
Cyber Fraudsters
ग्वालियर। साइबर ठगों ने लोगों को झांसे में लेकर बैंक खातों से रुपए उड़ाने का नया तरीका अपनाया है। ग्वालियर शहर और देहात में तीन लोगों को अलग-अलग बहाने से निशाना बनाकर ठगों ने कुल 3.35 लाख रुपए पार कर दिए। कहीं गैस कनेक्शन बंद होने का डर दिखाया तो कहीं क्रेडिट कार्ड एक्टिवेट कराने का झांसा दिया। ठगों ने पीड़ितों के मोबाइल पर APK फाइल भेजकर उन्हें क्लिक कराया और इसके बाद बैंक खातों में जमा रकम निकाल ली। ठगी का पता चलने के बाद पीड़ितों ने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत की। जांच के बाद पुलिस ने तीनों मामलों में साइबर ठगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
KYC के नाम पर कॉल, दो रुपए भेजते ही खाते से 95 हजार पार
सिरोल के श्रीजी एन्क्लेव निवासी जीतू वर्मा (43) के मोबाइल पर 20 अगस्त को अनजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को इंडेन गैस कंपनी का कर्मचारी बताया। उसने कहा कि KYC पूरी नहीं होने के कारण गैस कनेक्शन बंद हो सकता है। इसके बाद आरोपी ने ऑनलाइन KYC फॉर्म भेजकर उसे भरने के लिए कहा।
कुछ देर बाद ठग ने दो रुपए जमा करने के लिए QR कोड भेजा। जीतू ने भरोसा कर दो रुपए ट्रांसफर कर दिए। शाम को बैंक खाता चेक किया तो उनके खाते से 95 हजार रुपए निकाले जा चुके थे। उन्हें समझ आया कि KYC के नाम पर साइबर ठगों ने जाल में फंसाया था।
मोबाइल बंद रहा, चालू हुआ तो खाते से 1.80 लाख गायब
बिजौली के चिटोली गांव निवासी अजय बाथम ने पुलिस को बताया कि उनका मोबाइल 21 और 22 अगस्त को बंद रहा। मोबाइल चालू करने के बाद उनके फोन पर बैंक खाते से रुपए निकलने के मैसेज आने लगे। उन्होंने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का खाता चेक किया तो पता चला कि ठगों ने तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन में 1.80 लाख रुपए निकाल लिए हैं।
अजय को आशंका है कि मोबाइल बंद रहने के दौरान ही ठगों ने उनके बैंक खाते से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल कर रकम निकाल ली।
बैंककर्मी बनकर फोन, APK फाइल पर क्लिक कराया और 59,995 रुपए चोरी
मुरार के उमराव विहार निवासी विनोद सिंह तोमर ने बताया कि उन्होंने क्रेडिट कार्ड इश्यू कराया था। 26 अगस्त को उनके पास बैंककर्मी बनकर फोन आया। आरोपी ने क्रेडिट कार्ड एक्टिवेट कराने की बात कही और मोबाइल पर एक फाइल भेजी।
विनोद ने जैसे ही फाइल पर क्लिक किया, कुछ देर बाद उनके क्रेडिट कार्ड से 59,995 रुपए कट गए। इसके बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई।
APK फाइल से कैसे फंसाते हैं ठग?
APK यानी Android Package Kit फाइल एंड्रॉयड मोबाइल में ऐप इंस्टॉल करने के लिए इस्तेमाल होती है। साइबर ठग अक्सर बैंक, गैस कंपनी, डिलीवरी सर्विस या सरकारी विभाग के नाम पर ऐसी फाइल भेजकर लोगों को डाउनलोड या इंस्टॉल करने के लिए कहते हैं। इसके जरिए ठग मोबाइल की संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने या यूजर को धोखे से बैंकिंग संबंधी गतिविधियां करने के लिए मजबूर कर सकते हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी अनजान नंबर से आई APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल नहीं करना चाहिए। बैंक या किसी कंपनी के नाम पर आए ऐसे लिंक या फाइल पर क्लिक करने से पहले संबंधित संस्था के आधिकारिक नंबर पर संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।
Updated on:
01 Sept 2026 06:29 pm
Published on:
01 Sept 2026 06:28 pm
