
ग्वालियर। अल-नीनो रूपी प्रेत अभी भी प्रदेश का पीछा नहीं छोड़ रहा है। हालांकि पन्द्रह सितम्बर के बाद इसका असर तेजी से घटेगा, जिसके बाद बारिश की संभावना बढ़ गई है। इससे ग्वालियर अंचल को खास फायदा मिलेगा। दरअसल इस क्षेत्र में अब तक पिछले साल की तुलना में पचास फीसदी कम बारिश हुई है। यदि सितम्बर तक अंचल में अच्छी बरसात हो गई तो न केवल रबी की फसल बेहतर हो जाएगी बल्कि जल संकट भी दूर हो सकता है।
मध्यप्रदेश मौसम पूर्वानुमान विभाग के विज्ञानी अनुपम काश्यपी का मानना है मौसमी स्थिति के अनुसार मध्यप्रदेश में सितम्बर तक इस बार पिछले साल की तुलना में अच्छी बारिश होगी। इस बारिश से सबसे ज्यादा फायदा ग्वालियर अंचल या गिर्द एग्रो जोन को हो सकता है, जो अभी बरसात के हिसाब से अभी आपदाग्रस्त हैं। एक आशंका ये भी बताई जा रही है कि अलनीनो के प्रभाव से ग्वालियर अंचल की बारिश प्रभावित हो। फिलहाल अगर समूचे मध्यप्रदेश की बात करें तो पिछले साल 5 अगस्त तक की तुलना में १५-२० फीसदी बारिश कम हुई है।
अल-नीनो का असर
अननिनो का सबसे ज्यादा असर बरसात पर पड़ता है। इससे बरसात की अनियमितता बढ़ जाती है। जहां बारिश नहीं होती वहां मूसलाधार बारिश होती है, जहां बारिश सामान्य रहनी चाहिए। वहां सूखे की स्थिति बन जाती है।
क्या है अल-नीनो
अलनीनो एक जलवायुविक दशा है। ये एक गर्म जलधारा है। प्रशांत महासागर में पेरू तट को काफी गर्म कर देती है। चूंकि ये हवा के जरिए सभी भूगौलिक दशाओं को प्रभावित करती है, इसलिए मानसून प्रभावित होता है।
अल-नीनो स्पेनिश शब्द है। जिसका अर्थ होता है छोटा बच्चा या लिटिल बॉय। मध्यप्रदेश के संदर्भ में बता दें कि यहां की जलवायुविक दशा में इसका सीधा दखल वर्ष 2013-14 में देखा गया था। आंशिक असर 2015 में और इस साल 2017 में देखा जा रहा है।
Published on:
06 Aug 2017 02:15 pm
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