
- कोर्ट का सख्त रुख: इन्हें नहीं बचाया तो आने वाली पीढ़ियां भुगतेंगी परिणाम, राजनीतिक और प्रशासनिक ढिलाई पर कड़ी नाराजगी
प्राकृतिक धरोहर और पहचान रही पहाड़ियों पर लैंड माफिया के अवैध कब्जों और मुरम के बेखौफ उत्खनन को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह मामला केवल कानूनी या प्रशासनिक नहीं है, बल्कि हमारे अस्तित्व से जुड़ा है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि इन पहाड़ियों को समय रहते नहीं बचाया गया, तो इनका पूरी तरह समाप्त होना तय है, जिसका गंभीर पर्यावरणीय खामियाजा शहर की आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।
अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए माना कि राजनीतिक संरक्षण, प्रशासनिक ढिलाई और पुलिस की निष्क्रियता के कारण लैंड माफिया बेखौफ होकर पहाड़ियों को छलनी कर रहे हैं। विशेष रूप से गुड़ा-गुड़ी के नाके और आसपास के क्षेत्रों में पहाड़ों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। कोर्ट ने पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन (सार्वजनिक न्यास सिद्धांत) का हवाला देते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा करना राज्य की बुनियादी जिम्मेदारी है, जिसमें प्रशासन पूरी तरह विफल दिख रहा है।
कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी हाई-लेवल कमेटी
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने ग्वालियर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। इस कमेटी में नगर निगम, पुलिस, वन विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति, आयुर्वेद विशेषज्ञ और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों को शामिल किया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहाड़ियों को माफिया से मुक्त कराकर वहां फेंसिंग की जाए और बड़े पैमाने पर औषधीय व फलदार पौधे लगाए जाएं।
अब 'सिटी फॉरेस्ट' के रूप में पहचानेंगे पहाड़
कोर्ट ने एक दूरगामी कल्पना पेश करते हुए इन पहाड़ियों को 'सिटी फॉरेस्ट' के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया है। यहाँ मॉर्निंग वॉक, योग और पारिवारिक पिकनिक के लिए स्थान विकसित किए जाएंगे। इससे न केवल शहर का पर्यावरण सुधरेगा, बल्कि ग्वालियर में हर साल बढ़ती भीषण गर्मी से भी राहत मिल सकेगी। कोर्ट ने इस मॉडल को अन्य जिलों के लिए भी नजीर बनाने पर जोर दिया है।
हाई-पावर कमेटी में ये रहेंगे
1. अध्यक्ष: जिला कलेक्टर, ग्वालियर
2. समन्वयक/सचिव: विवेक खेडकर (एडिशनल एडवोकेट जनरल)
3. सदस्य: पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त, डीएफओ, कुलपति (कृषि विवि)
4. विशेषज्ञ: गौरिशंकर दुबे (पूर्व प्रिंसिपल रजिस्ट्रार), डॉ. धर्मेन्द्र रिछारिया (आयुर्वेद), डॉ. आशुतोष गुप्ता (सीनियर वेटरनरी सर्जन), प्रशांत शर्मा (अधिवक्ता)
4 बिंदुओं पर 23 अप्रेल को मांगी रिपोर्ट
- हाई लेवल कमेटी का विधिवत गठन और सभी सदस्यों की सहमति।
- कमेटी की पहली बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का ब्यौरा।
- पहाड़ियों के सर्वे और फेंसिंग के लिए तैयार की गई प्रारंभिक कार्ययोजना।
- सिटी फॉरेस्ट प्रोजेक्ट को लेकर धरातल पर शुरू की गई कार्रवाई।
Updated on:
8 Apr 2026, 11:14 AM IST
Published on:
8 Apr 2026, 11:14 AM IST
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