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सिविल जज के आचरण से नाराज MP हाईकोर्ट, जांच के दिए आदेश

MP News: आदेश की अवहेलना और लापरवाही बरतने के मामले को गंभीरता से लेते हुए सिविल जज के आचरण की जांच कराने के निर्देश दिए है।

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High Court ordered investigation into conduct of civil judge over disobeying its order mp news

MP High Court ordered investigation into conduct of civil judge (फोटो- Patrika.com)

MP News: ग्वालियर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपने आदेश की अवहेलना और लापरवाही बरतने के मामले को गंभीरता से लेते हुए सिविल जज के आचरण की जांच कराने के निर्देश दिए है। प्रकरण को किसी अन्य सिविल जज को सौपा जाए, जो चार माह के भीतर जांच पूरी करेगा। पूर्व में पीडब्ल्यूडी द्वारा तैयार की गई स्थल निरीक्षण रिपोर्ट पर निर्भर नहीं किया जाएगा, क्योंकि वह पक्षकारों की अनुपस्थिति में तैयार की गई प्रतीत होती है। याचिका की सुनवाई अब 20 अगस्त को होगी।

ये है मामला

दरअसल, मामला अशोक कुमार व अन्य बनाम मीरा देवी से संबंधित है। वर्ष 2013 में विवादित संपत्ति के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश दिया गया था। इसके बावजूद प्रतिवादी पक्ष ने विवादित भूमि पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया। इसे लेकर अशोक कुमार ने अवमानना का मामला दायर किया।

इस विवाद को देखते हुए हाईकोर्ट ने 4 अप्रैल 2024 को ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि वह यह जांच करे कि क्या अंतरिम आदेश का उल्लंघन कर निर्माण किया गया है। इसके लिए चार माह में जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे और पक्षकारों को 24 अप्रैल 2024 को ट्रायल कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने को कहा गया था। हालांकि, काफी समय बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई।

अतिरिक्त समय देने के बाद भी नहीं दी रिपोर्ट, अब होगी जांच

इस पर 8 अक्टूबर 2025 को ट्रायल कोर्ट को तुरंत रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए। इसके बाद 12 नवंबर 2025 को भी हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए दो माह का अतिरिक्त समय दिया और प्रिंसिपल जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भिंड को निर्देश दिया कि ट्रायल कोर्ट को निर्देशित करें कि वह अदालत के आदेशों के प्रति लापरवाही न दिखाए।

इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के बयान दर्ज कर विधिवत जांच करने के बजाय केवल लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री से स्थल निरीक्षण रिपोर्ट प्राप्त कर सीधे हाईकोर्ट को भेज दी। यहां तक कि पक्षकारों को सुनवाई का अवसर भी नहीं दिया गया और रिपोर्ट प्रिंसिपल जिला एवं सत्र न्यायाधीश के माध्यम से भेजने की निर्धारित प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया। (MP News)