
withheld pension (Photo Source - Patrika)
MP News: हाईकोर्ट एकल पीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी की पेंशन पूरी तरह रोकने से पहले उसे सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है। न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत की एकलपीठ ने 3 अप्रैल 2014 को जारी वह आदेश निरस्त कर दिया, जिसके तहत याचिकाकर्ता अजय कुमार पंडविया की 100 प्रतिशत पेंशन स्थायी रूप से रोक दी गई थी। याचिकाकर्ता वर्ष 1984 में सब इंजीनियर पद पर नियुक्त हुए थे और बाद में राजपत्रित अधिकारी घोषित किए गए।
भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम से जुड़े एक आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के बाद राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के नियम 9(1) के तहत उनकी पूरी पेंशन रोक दी थी। अदालत ने कहा कि नियम 9 के अंतर्गत पेंशन रोकने का अधिकार राज्यपाल को है, परंतु यह अधिकार असीमित नहीं है। यदि किसी न्यायिक कार्यवाही में कर्मचारी दोषी पाया गया हो, तब भी पेंशन पूर्णत: या आंशिक रूप से, अस्थायी या स्थायी रूप से रोकने से पहले प्राधिकारी को मामले की गंभीरता, दंड की अवधि और अन्य परिस्थितियों पर विचार करना होगा।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य लोक सेवा आयोग से परामर्श करना अनिवार्य है। इस प्रकरण में आयोग से परामर्श नहीं लिया गया और न ही याचिकाकर्ता को कोई अवसर-ए- सुनवाई दिया गया, जिससे आदेश विधिसम्मत नहीं ठहराया जा सकता। हाईकोर्ट ने आदेश को रद्द करते हुए प्रकरण को सक्षम प्राधिकारी को वापस भेज दिया है और निर्देश दिया है कि चार माह के भीतर विधि अनुसार, लोक सेवा आयोग से परामर्श लेकर तथा सुनवाई का अवसर प्रदान कर नया निर्णय लिया जाए।
Published on:
03 Mar 2026 05:37 pm
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