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गोद लिए बेटे को ‘अनुकंपा नियुक्ति’ मिलेगी या नहीं ! हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

Mp news: कर्मचारी की मृत्यु के 23 साल बाद मांगी थी अनुकंपा नियुक्ति, कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

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compassionate appointment

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Mp news:एमपी में ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मृतक कर्मचारी के आश्रित ने अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि यदि मृतक कर्मचारी के आश्रित लंबे समय तक जीवित रह सकती हैं तो अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य खत्म हो जाता है।

हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका

23 साल बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए याचिका दायर की। अपने आप में याचिका खारिज हो जाती है। दत्तक पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति देने की कोई नीति नहीं है। बाहिद खान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उसकी ओर से तर्क दिया गया कि वह मुनब्बर बेग का दत्तक पुत्र है। मुनब्बर बेग का 26 जून 2001 को निधन हो गया था। उसने जल संसाधन विभाग में अनुकंपा के लिए आवेदन किया, लेकिन अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी।

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शासन की ओर से याचिका का विरोध किया गया। दत्तक पुत्र को अनुकंपा नियुक्त देने का कोई प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी।