
5.19 बीघा जमीन की देर से अपील दायर करने का मामला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी मामलों में लापरवाही को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि नियुक्त अधिकारी (ओआइसी) अनजान नहीं रह सकता। अनजानगी नहीं चलेगी। एक बार ओआइसी नियुक्त होने के बाद फाइल की स्थिति जानना और आवश्यक कदम उठाना उसकी जिम्मेदारी है। कोर्ट ने राज्य शासन से विस्तृत जबाव मांगा है। याचिका की सुनवाई 15 अप्रेल को होगी।
दरअसल ग्वालियर स्थित 5.19 बीघा जमीन का फैसला सिविल कोर्ट से19 अप्रेल 2000 में योगेश अन्य के पक्ष में हो गया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य शासन ने अतिरिक्त सत्र न्यायालय में अपील दायर की, लेकिन अपील 9 अक्टूबर 2003 को खारिज हो गई। 2006 में हाईकोर्ट में सेकेंड अपील दायर की। 2009 में सकेंड अपील खारिज हो गई। राज्य शासन ने सेकेंड अपील को फिर से सुनवाई में लाने के लिए 3 हजार 327 दिन देर से आवेदन लगाया। 2009 में दायर सेकेंड अपील की सुनवाई की मांग की। यह अपील किस अधिकारी की गलती से खारिज हुई थी। इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं किया और न कार्रवाई का ब्यौरा पेश किया। इसको लेकर इस केस के जो प्रभारी रहे हैं, उन पर कार्रवाई कर रिपोर्ट मांगी है, लेकिन राज्य शासन लगातार कोर्ट को गुमराह कर रहा है और अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसके चलते कोर्ट ने नाराजगी जताई है। दो सवालों के जवाब मांगे। राज्य शासन ने केस प्रभारी वीरेंद्र कुमार सिंह, अनुराग सक्सेना, अनुज कुमार रोहतगी, मेहताब सिंह, सुचिस्मिता सक्सेना, वाक्की कार्तिकेयन, महीप तेजस्वी के बारे में कहा गया था कि उन्हें केस खारिज होने की जानकारी नहीं थी। इसको लेकर कोर्ट ने नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई (चार्जशीट) पर पुनर्विचार के लिए समय मांगा। साथ ही कलेक्टर की रिपोर्ट को सही ठहराने के लिए भी अतिरिक्त समय की मांग की गई।
Updated on:
7 Apr 2026, 11:08 AM IST
Published on:
7 Apr 2026, 11:05 AM IST
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