28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राष्ट्र निर्माण एवं जन कल्याण में संतों की महत्वपूर्ण भूमिका

- भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंध संस्थान में हुआ संत समागम

2 min read
Google source verification
राष्ट्र निर्माण एवं जन कल्याण में संतों की महत्वपूर्ण भूमिका

राष्ट्र निर्माण एवं जन कल्याण में संतों की महत्वपूर्ण भूमिका

ग्वालियर. सरस्वती मठ मैसूर कर्नाटक के मठाधिपति शंकर भारती के सानिध्य में भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंध संस्थान के अतिथि गृह में संत समागम किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत संतों ने मंत्रोच्चार के साथ गोपूजन से की। तत्पश्चात शंकर भारती ने सभी उपस्थित संतों एवं महंतों के साथ आध्यात्मिक वार्ता की। उन्होंने संस्कृत में उद्बोधन दिया जिसका हिंदी अनुवादन पंडित विष्णु तिवारी ने किया। उन्होंने कहा कि अद्वैत विचारधारा के संस्थापक शंकराचार्य है उसे शांकराद्वैत भी कहा जाता है। शंकराचार्य मानते हैं कि संसार में ब्रह्म ही सत्य है, जगत् मिथ्या है, जीव और ब्रह्म अलग नहीं हैं। जीव केवल अज्ञान के कारण ही ब्रह्म को नहीं जान पाता जबकि ब्रह्म तो उसके ही अंदर विराजमान है। उन्होंने आगे कहा कि जीवन में तीन चीजें महत्वपूर्ण हंै - गुरु के चरणों की सेवा, गुरु का आशीर्वाद और गुरु की वाणी। गुरु की वाणी केवल सुनना भर नहीं हैं, बल्कि उस पर चलना भी हैं। इससे ही मनुष्य का कल्याण होगा और वे दुखों से दूर होगा। संतों ने ही इस राष्ट्र को विश्व गुरु बनाया है। जब-जब इस देश को आवश्यकता पड़ी तब प्राचीन मनीषियों ने समाधान प्रस्तुत किया और इस राष्ट्र की वृद्धि में अपना योगदान दिया। राष्ट्र निर्माण एवं जन कल्याण में संतों की महत्वपूर्ण भूमिका है। संतों को एकमत होकर राष्ट्र के उत्थान के लिए कार्य करना चाहिए। इस दौरान स्वामी शंकर भारती ने परिसर में उपस्थित सामान्य जनमानस के प्रश्नों का समाधान भी किया।

ये रहे मौजूद
संत समागम में नाथ संप्रदाय सच्चिदानंदनाथ ढोलीबुवा महाराज, संत देवप्रकाश गिरि पंचायती निरंजनी अखाड़ा, पूरण वैराठी महंत रामसेवक दास महाराज (गंगादास की बड़ी शाला), स्वामी ऋषभ देवानंद (श्री कृष्णायण आदर्श गौशाला), आचार्य मंत्र प्रेमानंद अवधूत, स्वामी कमल पुरी महाराज, महंत कपिल महाराज, स्वामी रमेशानंद (आदर्श गौशाला), स्वामी मधुवेंद्रानंद (भागीरथी धाम, ऋषिकेश), स्वामी चिदानंद (शंकराचार्य बोधगया मठ), महंत शिवशरण महाराज (महंत द्वारका), महंत हर्षद, महंत हरिओम शरण, संस्थान के नोडल अधिकारी डॉ.चंद्र शेखर बरुआ, वरिष्ठ फैकल्टी डॉ.सौरभ आदि मौजूद थे। कार्यक्रम में स्वस्ति वाचन पंडित बालकृष्ण त्रिवेदी एवं कृष्णकांत पंचारिया, सूत्र संचालन अंशुमान सेंगर एवं आभार प्रदर्शन संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) आलोक शर्मा ने किया।