
Income tax
ग्वालियर। टैक्स की चोरी करने वाले करदाताओं पर फिर आयकर विभाग का शिकंजा कसने वाला है। अब सर्च और सर्वे पहले की तरह होंगे। सीबीडीटी (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) ने संयुक्त आयकर आयुक्त (सीआइटी) को फिर इसके अधिकार दिए हैं। करदाताओं के लिए लागू हुए फेसलेस अधिनियम के चलते क्षेेत्रीय आयकर अधिकारियों से सर्च और सर्वे के अधिकार छीन लिए गए थे। कुछ समय से ये कार्य आयकर विभाग की इन्वेस्टीगेशन विंग कर रही थी। हालांकि सर्च और सर्वे की अनुमति, सुपरविजन और दिशा-निर्देश प्रधान आयकर आयुक्त की ओर से ही दिए जाएंगे। आयकर विभाग की ओर से इस तरह के सर्च और सर्वे सितंबर-2020 से बंद थे।
एक्टिव मोड में आएगा आयकर विभाग
नितिन पहारिया, चार्टर्ड अकाउंटेंट का कहना है कि जहां नकद लेन-देन, अचल संपत्तियों का लेन-देन या कोई जीएसटी के लिए फर्जी एंट्री ली जाती है, ऐसे सभी लोगों पर अब आयकर विभाग सर्च और सर्वे की कार्रवाई करेगा। काफी समय से ये सब बंद थे। आयकर विभाग को करदाता की सभी जानकारियां कम्प्यूटर और विभिन्न माध्यमों से प्राप्त होती हैं, अब सर्च-सर्वे के अधिकार मिलने से विभाग पहले वाले एक्टिव मोड में आ जाएगा।
ऐसे होती है सर्च और सर्वे की कार्रवाई
सर्वे की कार्रवाई आयकर अधिकारी प्रारंभिक सूचना या टिप के आधार पर करते हैं। जबकि सर्च की कार्रवाई बड़े पैमाने पर की जाती है। इसमें करदाता के साथ उसके रिश्तेदारों, पार्टनर और परिवार वालों के यहां भी छानबीन की जाती है। सबसे अधिक सर्च और सर्वे जनवरी से मार्च के बीच टारगेट पूरे करने के लिए किए जाते हैं। पहले महीने में एक या दो सर्च-सर्वे हो जाते थे। ऐसे में माना जा रहा है कि अब लक्ष्यों की पूर्ति और राजस्व में बढ़ोतरी के लिए ये कार्रवाई बढ़ जाएंगी।
Published on:
04 Dec 2022 05:33 pm
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