
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि क्षतिग्रस्त गाड़ी का क्लेम 7.98 लाख रुपए 6 फीसदी ब्याज के साथ अदा करे। मानसिक पीड़ा पहुंचाई है, उसके लिए 10 हजार रुपए अलग से दिए जाएं और 5 हजार रुपए केस लड़ने का खर्च भी दिया जाए।
दरअसल अनीता गुप्ता की कार 28 अगस्त 2020 को क्षतिग्रस्त हो गई थी। कार की मरम्मत एजेंसी पर कराई। मरम्मत के बाद गाड़ी को घर लेकर आए। कार को 21 सितंबर 2020 को वर्कशॉप से लेकर आए और इंदरगंज पर खड़ा कर दिया। हेड लाइट से धुंआ निकलता दिखा। जब गाड़ी का बोनट खोला तो उसके अंदर आग लग चुकी थी। बाल्टी से पानी डालकर आग को बुझाया गया। इसकी सूचना कार एजेंसी को दी और क्रेन मौके पर आई और कार को वर्कशॉप में लेकर पहुंची। आग के कारण पूरी तरीके से कार क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। एसबीआइ जनरल इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम मांगा। बीमा कंपनी ने क्लेम राशि खारिज कर दी।
उपभोक्ता का तर्क- प्रीमियम लिया है...कंपनी बोली- ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था
अनीता गुप्ता ने उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर किया। उनकी ओर से तर्क दिया कि गाड़ी का बीमा था और बीमा की प्रीमियम राशि भी जमा की, लेकिन कंपनी कंपनी ने बीमा राशि देने से मना कर दिया। बीमा कंपनी को ओर से जवाब दिया गया कि गाड़ी को आकाश गुप्ता चला रहे थे, उनके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है। परिवाद में तथ्यों को छिपाया गया है। इसलिए परिवाद खारिज किया जाए। उपभोक्ता फोरम ने दोनों पक्षों सुनने के बाद बीमा कंपनी की सेवा में कमी मानी है। 7 लाख 98 हजार रुपए छह फीसदी ब्याज के साथ अदा करे। ब्याज का भुगतान फरवरी 2021 से करना होगा।
Updated on:
14 Jan 2024 09:33 am
Published on:
14 Jan 2024 09:32 am
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