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सोने की खरीदी पर ज्वैलर्स लगा रहे मनमाना मेकिंग चार्ज

केंद्र सरकार का आम बजट आने के बाद से हर दिन सोने के दामों में गिरावट आ रही है। ऐसे में यदि आपका मन सोना खरीदने का हो रहा है तो ऐसा कर सकते हैं लेकिन सराफा बाजार...

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सोने की खरीदी पर ज्वैलर्स लगा रहे मनमाना मेकिंग चार्ज

ग्वालियर. केंद्र सरकार का आम बजट आने के बाद से हर दिन सोने के दामों में गिरावट आ रही है। ऐसे में यदि आपका मन सोना खरीदने का हो रहा है तो ऐसा कर सकते हैं लेकिन सराफा बाजार में मिलने वाले गहनों के दाम असल में सोने के दामों से काफी अधिक हो सकते हैं। साथ ही ये दाम हर दुकान या शोरूम पर आपको अलग-अलग ही मिलेंगे। ऐसा संभव होता है सोने के गहनों पर लगाई जाने वाले मेकिंग चार्ज की बदौलत। सराफा कारोबारी गहनों की मेकिंग पर 5 से लेकर 25 फीसदी तक मनमाने मेकिंग चार्ज की वसूली कर ग्राहकों की जेब काट रहे हैं और उन्हें रोकने वाला भी कोई नहीं है। मजे की बात यह है कि मेकिंग चार्ज को लेकर कोई नियम नहीं है।


तो देने लगते हैं छूट
त्योहारों के समय सराफा कारोबारी मेकिंग चार्ज पर छूट के आकर्षक ऑफर भी निकालते हैं। वहीं कुछ कारोबारी तो मेकिंग चार्ज पूरी तरह से खत्म कर देते हैं और यह ग्राहकों को रिझाने के लिए किया जाता है।


जाने मेकिंग चार्ज को
सोने से तैयार किए जाने वाले गहनों में पहले टांका लगाया जाता था, अब मेकिंग चार्ज ने इसकी जगह लेे ली है। ज्वेलरी तैयार करने में लिया जाने वाला मेहनताना ही मेकिंग चार्ज है, यह कितना होगा गहने और कारोबारी पर निर्भर करता है। जिस क्वालिटी और ग्राम के गहने होंगे उसके मुताबिक कारोबारी मनमाने ढंग से ग्राहक से चार्ज की वसूली करते हैं।


इस तरह से काटा जा रहा मेकिंग चार्ज
सराफा बाजार में दो तरह के गहने मिलते हंै। बीआइएस अप्रूव्ड, इसमें मेकिंग चार्जेस लगभग 500 से 600 रुपए प्रति ग्राम है और नॉन बीआइएस अप्रूव्ड जिसमें मेकिंग चार्जेस 120 से 200 रुपए प्रति ग्राम है। इन दिनों 22 कैरेट 10 ग्राम गोल्ड की कीमत 46000 रुपए है, तो इस हिसाब से बीआइएस अप्रूव्ड ज्वेलरी पर मेकिंग चार्ज के साथ लगभग 52500 रुपए के आसपास पड़ेगी। इसमें 3 फीसदी जीएसटी भी लगता है। 10 ग्राम सोने में इतना अंतर देखकर अक्सर कस्टमर भी चकरा जाता है।


बेचने पर काटा जाता है मेकिंग चार्ज
ग्राहक जब अपने गहनों को बेचने के लिए जाता है तो सराफा कारोबारी मेकिंग चार्ज काटकर केवल गोल्ड का रुपया थमा देते हैं। ऐसे में ग्राहक को अपनी खरीद वैल्यू का 30 फीसदी तक हिस्सा खोना पड़ता है। इसमें से करीब 20 फीसदी मेकिंग चार्ज का होता है।