
विघ्न विनाशक श्रीगणेश को कौन नहीं जानता। लेकिन उनकी फैमिली मैनेजमेंट के बारे में कम लोगों को पता है। लोग घर-दफ्तर पर शुभ-लाभ लिखते हैं, लेकिन उसके महत्व को नहीं जानते। गणेश जी के परिवार के और भी सदस्य हैं। जिनका मनुष्य की सांसारिक-पारमार्थिक तरक्की में बड़ा योगदान हो सकता है।
देवेन्द्र शर्मा @ ग्वालियर
विघ्न विनाशक श्रीगणेश को कौन नहीं जानता। लेकिन उनकी फैमिली मैनेजमेंट के बारे में कम लोगों को पता है। लोग घर-दफ्तर पर शुभ-लाभ लिखते हैं, लेकिन उसके महत्व को नहीं जानते। गणेश जी के परिवार के और भी सदस्य हैं। जिनका मनुष्य की सांसारिक-पारमार्थिक तरक्की में बड़ा योगदान हो सकता है।
इसी समस्या के निराकरण के लिए जीवाजी यूनिवर्सिटी के मैनेजमेंट संस्थान आधा दर्जन शोधों व 10 साल की रिसर्च में सामने आया है कि कोई श्रीगणेश के फैमिली मैनेजमेंट को जीवन में ढाले तो परिवार के साथ व्यापार को ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। रिसर्च स्कॉलर ने देश में एक हजार परिवारों से उनके अनुभव जाने।
करें मनन: किसी भी कार्य को प्रारंभ करने इनका वंदन किया जाता है। कार्य शुरू करने से पहले मनन करें कि इससे किसी का अनिष्ट तो नहीं होगा। आर्थिक कार्य में लाभ का ५ प्रतिशत हिस्सा जरूरतमंदों पर खर्च करना चाहिए।
त्यागें कपट: बालक, स्त्री और बुजुर्गों का सम्मान अनिवार्य है। मैनेजमेंट में सफल होने छल, कपट और स्त्री मोह को त्यागने की शर्त है। जब कथनी और करनी एक हो जाती है वहीं से यह मैनेजमेंट शुरू हो जाता है।
ऋिदि-सिद्धि (पत्नी)
जब व्यक्ति सात्विक रूप से कार्य प्रारंभ करता है तो घर में ऋिद्धि-सिद्धि का निवास हो जाता है जो शुभ कर्मों का प्रभाव इस हद तक देती हैं जो शब्दों में नहीं ढाल सकते।
तुष्टि-पुष्टि (पुत्रवधू)
व्यक्तिसात्विक कर्मों से लाभ कमाता है तो लाभ को श्रीगणेश की पुत्रवधु तुष्टि-पुष्टि स्थिर कर देती हैं। यानि किसी भी प्रकार की विपत्ति से उसकी सारी संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है।
शुभ-लाभ (पुत्र)
व्यक्तिको व्यापार में श्रीगणेश के पुत्र शुभ और लाभ कर्म के फल के रूप में प्राप्त होते हैं, यह तभी आते हैं जब व्यक्ति की अर्जित आय सात्विक कर्मों से अर्जित की गई हो। ये दोनों इसी बात के प्रतीक हैं।
आनंद -प्रमोद (पौत्र)
जब व्यक्तिअपने सभी कर्मों को निभाता है तो उसे गणेश जी के दोनों पौत्र आनंद और प्रमोद की कृपा प्राप्त हो जाती है। इसमें व्यक्ति की सारी इच्छाएं स्वत: ही खत्म होकर संसार के राज को जान जाता है।
60 प्रतिशत: लोगों को नहीं पता कि शुभ-लाभ का प्रभाव क्या है।
सर्वे: ग्वालियर बंगाल, गुजरात, हैदराबाद, चंडीगढ़, उड़ीसा
40 प्रतिशत: मैनेजमेंट पालन करने से परिवार-व्यापार संकट खत्म
पहले: फैमिली मैनेजमेंट पर न चलने से आ गए थे संकट में
30 प्रतिशत: आज भी मानते हैं मैनेजमेंट को तरक्की का आधार
यह किया: काम, क्रोध, लोभ मोह और अहंकार से दूरी बनाई।
Published on:
31 Aug 2017 07:56 am
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