
ग्वालियर/ कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के तेवर को देख तो यहीं लग रहा है कि मध्यप्रदेश में शायद सरकार को विपक्ष की जरूरत नहीं है। सिंधिया लगातार सरकार की खामियों को सार्वजनिक रूप से उठा रहे हैं। संगठन के कार्यक्रमों से भी खुद को दूर रखे सिंधिया ने एक बार फिर से मिलावटखोरी को लेकर सरकार पर हमला बोला है। सवाल उठाया है कि आखिर जब शुद्ध के खिलाफ युद्ध चल रहा है तो मिलावटखोर छूट कैसे जा रहे हैं।
सिंधिया पिछले एक महीने से मध्यप्रदेश में सक्रिय हैं। बाढ़ के बाद उनकी सक्रियता कुछ ज्यादा ही बढ़ गई। बाढ़ प्रभावित इलाकों का वो लगातार दौरान कर पीड़ित लोगों का दर्द जान रहे थे। उस दौरान भी वह सरकारी व्यवस्थाओं से नाराज दिखे थे। किसानों को बिना सर्वे के मुआवजा मिले इसके लिए सीएम कमलनाथ से मुलाकात भी की थी। कर्जमाफी को लेकर भी सवाल उठाया।
ग्वालियर में फिर किया हमला
सिंधिया हर दो-दिन बाद सरकार पर एक बम फोड़ देते हैं। सिंधिया के हमसे से सरकार भी असमजंस में पड़ जाती है। अब सिंधिया ग्वालियर में मिलावटखोरी को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मंच से कहा कि मैं प्रदेश में कई कहानियां सुन रहा हूं। मिलावट को रोकने के लिए छापे पड़ रहे हैं। लेकिन छापे के बाद मिलावटखोरों को छोड़ दिया जाता है।
मंत्री को दी हिदायत
स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के ही मंत्री हैं। उन्हें मंच से सख्त हिदायत देते हुए सिंधिया ने कहा कि मंत्री जी आपने जो नारे दिए हैं वो नारे नहीं रहने चाहिए। शुद्ध के लिए युद्ध का मतलब है कि फिर युद्ध होना चाहिए। मंत्री जी आपसे निवेदन है कि मिलावटखोरों को जेल में पहुंचाया जाए। उन्होंने तुलसी सिलावट को कहा कि आपरे ऑर्डर के बिना केस क्लोज नहीं होना चाहिए।
सीएम को देनी पड़ी थी सफाई
मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने किसानों के दो लाख रुपये तक का कर्जमाफी का ऐलान किया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पिछले दिनों कहा कि अभी तक पचास हजार रुपये का ही कर्ज माफ हुआ है जबकि हमने वादा दो लाख रुपये तक की थी। सिंधिया के इस बयान पर सीएम कमलनाथ ने ही खुद ही सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि हां, हम अगले स्टेज में इसको पूरा करेंगे।
झाबुआ से रहे दूर
सिंधिया नाराज हैं। पार्टी उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिश भी नहीं कर रही हैं। झाबुआ उपचुनाव के लिए वोटिंग संपन्न हो गया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम भी स्टार प्रचारकों की सूची में था। लेकिन वह एक दिन भी झाबुआ में वोट मांगने नहीं गएं और न ही कभी किसी कार्यक्रम में झाबुआ को लेकर बात की। ऐसा ही लोकसभा चुनाव के दौरान भी हुआ था जब सिंधिया ने खुद को मध्यप्रदेश में अपने क्षेत्र तक ही सीमित कर लिया था। झाबुआ की कमान सीएम कमलनाथ संभाले हुए थे।
महाराज ही बनेंगे अध्यक्ष
ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक लगातार उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहे हैं। दो दिन पूर्व ही उनके खेमे की मंत्री इमरती देवी ने कहा कि पार्टी मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया को ही प्रदेश अध्यक्ष बनाएगी। इमरती ने तो यहां तक कह दिया कि कार्यकर्ताओं को निराश होने की जरूरत नहीं है, महाराज ही प्रदेश अध्यक्ष बनेंगे। लेकिन बागी रुख अपनाए सिंधिया पर पार्टी फिलहाल खामोश है।
Published on:
21 Oct 2019 06:11 pm
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