70 साल बाद करवाचौथ पर बन रहा है यह योग, पति के लिए है विशेष फलदायी, जानिए

70 साल बाद करवाचौथ पर बन रहा है यह योग, पति के लिए है विशेष फलदायी, जानिए
70 साल बाद करवाचौथ पर पड़ रहा है यह योग, पति के लिए है विशेष फलदायी

monu sahu | Updated: 09 Oct 2019, 11:47:19 AM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

Karva Chauth 2019 : पति के लिए व्रत रखने वाली सुहागिनों के लिए यह बेहद फलदायी है

ग्वालियर। इस बार करवा चौथ 17 अक्टूबर को कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को कृत्तिका नक्षत्र में शुरू होकर रोहिणी नक्षत्र में समाप्त होगी। इस दिन चंद्रोदय रात्रि में लगभग 8:34 पर होगा, जिसका मान अलग- अलग स्थानों पर भिन्न हो सकता है। ज्योतिषाचार्य अशोक भटनागर ने बताया कि मान्यता है कि 27 नक्षत्र चंद्रमा की 27 पत्नियां हैं, जिसमें से रोहिणी उन्हें विशेष प्रिय है जिस पर चंद्रदेव अपना सारा प्यार और स्नेह उड़ेल देना चाहते हैं! इसीलिए रोहिणी नक्षत्र में पत्नी द्वारा पूजा और चंद्रदर्शन पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य और संपन्नता के लिए विशेष फलदायी होता है। इस बार मंगल भी चंद्रमा के अन्य नक्षत्र हस्त में स्थित है जिसके कारण चंद्रदेव मंगल की अजेय शक्ति भी अपने साथ लिए हुए हैं! इस दिन स्त्रियां लाल वस्त्र धारण करें, सफेद या काले वस्त्र धारण ना करें। दूध, दही, चावल या सफेद वस्त्र किसी को दान में भी ना दें।

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भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा के मिलन पर बना था योग
ज्योतिषाचार्य एचसी जैन जैन ने बताया कि करवाचौथ पर रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा में रोहिणी का योग होने से मार्कण्डेय और सत्यभामा योग बन रहा है। यह योग चंद्रमा की 27 पत्नियों में सबसे प्रिय पत्नी रोहिणी के साथ होने से बन रहा है। पति के लिए व्रत रखने वाली सुहागिनों के लिए यह बेहद फलदायी होगा। ऐसा योग भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा के मिलन के समय भी बना था। उन्होंने बताया कि करवाचौथ के दिन व्रत रखने वाली महिलाएं यदि लाल रंग के कपड़े पहनती हैं तो उन्हें जिंदगी भर पति का प्यार मिलेगा। माना जाता है कि लाल रंग गर्मजोशी का प्रतीक है और मनोबल भी बढ़ाता है। साथ ही लाल रंग प्यार का प्रतीक भी माना जाता है। लाल रंग में महिलाएं अधिक सुंदर और आकर्षित दिखती हैं। नीले, भूरे और काले रंग के कपड़े न पहनें, क्योंकि ये अशुभता के प्रतीक हैं।

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पूजा का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य भटनागर ने बताया कि चतुर्थी तिथि 17 अक्टूबर को सुबह 6:48 पर कृत्तिका नक्षत्र में शुरू होगी। चंद्रदेव 17 अक्टूबर को ही अपरान्ह 3:39 पर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे! पूजा का शुभ मुहूर्त सांयकाल 5:46 से 7:02 तक रहेगा।

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