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झाड़ू को बनाया सेवा का साधन, 50 साल से राजेंद्र शर्मा निभा रहे ‘स्वच्छ्ता का व्रत’

77 की उम्र में भी राजेंद्र शर्मा का संकल्प नहीं टूटा है। वह खुद ही अपनी गली की सफाई करते हैं और पिछले 50 वर्षों से यह काम कर रहे हैं।
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Old man sweeping

गली में झाड़ू लगाता शख्स (Representational Photo)

सेवा के लिए न पद की ज़रूरत होती है और न प्रचार की। न ही पैसे की और न ही पावर की। मन में समाज के लिए कुछ करने का जज़्बा हो तो उम्र और बीमारी भी सेवा-भाव के रास्ते में नहीं आती। ग्वालियर के रवि नगर निवासी 77 वर्षीय वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र शर्मा (Rajendra Sharma) इसका उदाहरण हैं। जिला न्यायालय में वकालत करने वाले राजेंद्र पिछले 50 वर्षों से रोज सुबह स्वयं झाड़ू लगाकर अपनी गली और सड़क की सफाई करते हैं।

कभी सफाई को छोटा काम नहीं माना

राजेंद्र की पत्नी अनीता शर्मा पूर्व पार्षद रह चुकी है, लेकिन उन्होंने कभी सफाई को छोटा काम नहीं माना। यही वजह है कि उनकी गली में लोग कचरा फैलाने से भी बचते हैं। राजेंद्र रोज सुबह 5 बजे झाड़ू लेकर अपने घर से निकलते हैं और अपनी गली-मोहल्ले के लोगों के जागने से पहले पूरी सड़क साफ कर देते हैं। इसके बाद शाम को न्यायालय से लौटते समय भी कहीं कचरा दिख जाए तो उसे सड़क से उठाकर डस्टबिन में डालना नहीं भूलते।

संत की सीख काम आई

राजेंद्र बताते हैं कि कॉलेज के दिनों में ग्वालियर किले पर एक संत को रास्ते से कांटे और कचरा हटाते देखा था। कारण पूछने पर संत ने कहा, "दूसरों का रास्ता साफ करना सबसे बड़ा पुण्य है।" उस दिन से यही सीख राजेंद्र के जीवन का संकल्प बन गई। वर्ष 1978 में उन्होंने घासमंडी क्षेत्र से सफाई शुरू की और कुछ साल बाद रवि नगर आने के बाद भी सफाई का यह सिलसिला जारी रहा।

सर्जरी के बाद भी नहीं बदली आदत क्योंकि...

राजेंद्र की कुछ समय पहले बायपास सर्जरी हुई। डॉक्टरों ने आराम की सलाह दी, लेकिन निर्धारित अवधि पूरी होते ही उन्होंने फिर झाड़ू उठा ली। उनका कहना है कि सफाई उनके लिए आदत नहीं, जीवन का हिस्सा है।

पहले सफाई, फिर बेटी की विदाई

स्वच्छता के प्रति राजेंद्र का समर्पण बेटी की शादी के दिन भी दिखा। विवाह समारोह के बीच सुबह घर पहुंचकर उन्होंने पहले गली की सफाई की, फिर लौटकर बेटी की विदाई में शामिल हुए। राजेंद्र मानते हैं कि स्वच्छता सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि संस्कार भी है।