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करवा चौथ8 अक्टूबर को, महाव्रत की तैयारी में जुटी महिलाएं

वस्त्र, आभूषण के साथ ही सोलह श्रृंगार सामग्री की खरीदारी करने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं बाजार में उमड़ पड़ी हैं।

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हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए करवाचौथ का विशेष महत्व है। खुशहाल दाम्पत्य जीवन की कामना के साथ इस बार यह व्रत कार्तिक महीने की चतुर्थी 8 अक्टूबर रविवार को रखा जाएगा। महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के निर्जला व्रत करेंगी। इसके लिए महिलाओं ने जोरदारी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। वस्त्र, आभूषण के साथ ही सोलह श्रृंगार सामग्री की खरीदारी करने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं बाजार में उमड़ पड़ी हैं।


करवाचौथ व्रत के लिए महिलाओं द्वारा लाल साड़ी, चुनरी, लहंगा- चुन्नी, सलवार सूट के साथ ही सोने- चांदी के आभूषण की भी खरीदारी की जा रही है। महिलाएं चूड़ी, बिंदी, मेंहदी, सिंदूर सहित श्रंृगार की अन्य सामग्री भी खरीद रही हैं। कई महिलाएं ब्यूटी पार्लरों पर पहुंचकर सजने- संबरने के उपक्रम में लगी हुई हैं। व्रत रखने के साथ ही देव पूनज के लिए सामग्री खरीद रहीं हैं इसमें मिट्टी से निर्मित करवा, सिरकी और पूजन के लिए तस्वीरें खरीद रही हैं।


पूजन के साथ सुनी जाती है वीरवती की कहानी: सात भाइयों में अकेली बहन थी वीरवती। सबकी प्यारी वीरवती की शादी हुई तब उसने करवाचौथ व्रत मायके में रखा। भाइयों से कठिन व्रत करते न देखा गया तब उन्होंने पीपल के पेड़ पर सीसा लटका कर कह दिया चांद निकल आया। जब वह व्रत खोलने वाली थी तभी नौकर ने उसके पति की मौत का संदेश दिया। तब वीरवती रात भर रोती रही इसी बीच देवी प्रकट हुई और कहा पति को फिर से जीवत पाना है तो करवाचौथ व्रत करे जब उसने ऐसा किया तो यमराज को उसके पति को जीवित किया।


सूर्योदय से पहले शुरू हो जाती है व्रत की प्रक्रिया

करवाचौथ के दिन व्रत की प्रक्रिया सूर्योदय से पूर्व शुरू हो जाती है। सूर्योदय से पहले ऐसी खान- पान सामग्री का सेवन कर लिया जाता है जिससे दिन भर निर्जला व्रत रखा जा सके। इसके लिए मिठाई, मठरी, काजू- किशमिश सहित अन्य खान- पान सामग्री का सेवन किया जा सकता है।जब व्रत पूरा हो जाता है तब परिजन के साथ खीर, पूड़ी, सब्जी आदि व्यंजनों का लुत्फ उठाया जाता है।

शिव परिवार व चंद्रमा की जाती है पूजा अर्चना
करवाचौथ व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश व चंद्रमा की पूजा करने का विधान है। पहले देव पूजन किया जाता है इसके पश्चात चंद्रोदय होने पर पूजन किया जाता है तथा जल अर्पण किया जाता है। भगवान को हलवा, पूड़ी, मठरी, खीर आदि का भोग लगाया जाता है। इसके बाद चांद एवं पति का छलनी से दर्शन किया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद व्रत खोला जाता है। परिवार में अपने से बड़ी महिलाओं को सुहाग की सामग्री भेंट करते हुए आशीर्वाद लिया जाता है।