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ज्ञान, वैराग्य एवं भक्ति की प्राप्ति होती है शिव आराधना से

- लक्ष्मीगंज स्थित रामद्वारा में सात दिवसीय शिवमहापुराण का दूसरा दिन

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ज्ञान, वैराग्य एवं भक्ति की प्राप्ति होती है शिव आराधना से

ज्ञान, वैराग्य एवं भक्ति की प्राप्ति होती है शिव आराधना से

ग्वालियर. शिव आराधना से ज्ञान, वैराग्य, क्षमा एवं भक्ति की प्राप्ति होती है। उक्त विचार अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के संत रामप्रसाद महाराज ने लक्ष्मीगंज स्थित रामद्वारा में शुक्रवार से शुरू हुए 7 दिवसीय शिव महापुराण के दूसरे दिन व्यक्त किए।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिव की भक्ति एवं सत्संग की समृद्धि मिलती है। शिव कृपा से भाग्य भी बदला जा सकता है। कथा में शिव पूजन रहस्य, शिव तत्व रहस्य, प्रणव मंत्र और पंचाक्षर मंत्र का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि शिवलिंग को लेकर आमजन में अनेक भ्रांतियां हैं कि घर में शिवलिंग की पूजा नहीं की जा सकती है। पर शिवपुराण में वर्णित है कि घर में स्फटीक, धातु, सोने, चांदी, आदि के ठोस शिवलिंग का पूजन किया जा सकता है जिसकी ऊंचाई 6 इंच से ज्यादा न हो एवं जो स्थिर न होकर चलायमान हो क्योंकि घर मे शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा नहीं हो सकती है। जहां शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा हो जाती है वहां शिव का निवास हो जाता है। शिव के पूजन के लिए 3 चीजें जरूरी है - पहला शिव नाम का उच्चारण, दूसरा माथे पर भस्म का तीरपुण्ड एवं गले मे रुद्राक्ष। शिवपूजन में रुद्राक्ष धारण का विशेष महत्व है क्योंकि रुद्राक्ष का अर्थ है रुद्र का अक्ष अर्थात ये शिव के नेत्रों से प्रेम एवं करुणा भरे जीवन की सार्थकता के फलस्वरूप गिरे आँसू से पैदा हुआ है। कथा का समय दोपहर 2 से 5 बजे तक रखा गया है।
क्रोध की उत्पत्ति से होता है व्यक्ति का पतन
संत रामप्रसाद ने कहा कि जीवन मे सुख शांति के लिए व्यक्ति को अपने मुख में मिठास अर्थात अच्छे वचन, आंखों में दया और करुणा तथा मस्तक पर शीतलता को धारण किए रहना चाहिए और हाथों से भगवत सेवा करनी चाहिए। नारद मोह की कथा के माध्यम से उन्होंने बताया कि साधक को अधिक कामनाओं से बचना चाहिए कामना की पूर्ति ना होने पर क्रोध उत्पन्न होता है और क्रोध से व्यक्ति का पतन होता है।