
रवींद्र सिंह कुशवह @ मुरैना
जिले के 151 शासकीय प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों मेें विद्यार्थियों के लिए पीने के पानी का इंतजाम नहीं है। प्यास लगने पर बच्चों को अपने घर जाना पड़ता है। एमडीम खाने के बाद और हाथ धोने तक को पानी नहीं है। ऐसे में अन्य सुविधाओं की कल्पना करना भी बेमानी लगता है। सरकार ने इस बड़ी समस्या पर भी महज २८ संस्थानों में नल जल योजना एवं हैंडपंपों के लिए बजट जारी किया है।
जिले में एक हाजर 798 शासकीय प्राथमिक एवं ५५३ माध्यमिक विद्यालयों में दो लाख से ज्यादा बच्चे दर्ज हैं। इन स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं जुटाने की कवायद अनिवार्य एवं नि:शुल्क शिक्षा अधिनियम लागू होने के बाद तेज की गई है। लेकिन इसके बावजूद 151 स्कूलों में पीने के पानी तक का इंतजाम नहीं है। ऐसे में शौचालय एवं अन्य सुविधाओं के बारे में तो सोचा भी नहीं जा सकता।
राज्य शिक्षा केंद्र ने पेयजल स्रोत विहीन स्कूलोंं में पीने के पानी का इंतजाम करने के लिए बजट जारी किया है। लेकिन यह बजट ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। मुरैना जिले की ही तुलना करें तो १५१ स्कूलों में पेयजल स्रोत नहीं हैं। लेकिन जो बजट जारी हुआ है उसमें 28 स्रोत तैयार करने का ही प्रावधान है। इसमें छह नल जल योजनाएं और 22 हैंडपंप स्थापित करने को कहा गया है। जिन स्कूलों में पीने का पानी नहीं है, वहां एमडीएम व्यवस्था भी समुचित नहीं हो पाती है। बच्चों को पीने के लिए पानी चाहिए, लेकिन स्कूल में नहीं मिल पाता। ऐसे में बच्चे भोजन खाते हुए या साथ में लेकर घर चले जाते हैं। पीने का पानी नहीं होने का प्रतिकूल प्रभाव शिक्षण व्यवस्था पर भी पड़ता है।
स्रोत के बजट पर सवाल
जिले में 151 प्रावि व मावि में पेयजल स्रोत नहीं हैं। कोशिश की जा रही है कि सभी जगह व्यवस्था हो जाए। अभी 28 स्रोत तैयार करने के लिए बजट जारी हुआ है। प्राथमिता और आवश्यकता के आधार पर स्कूलों का चयन किया जाएगा। काम जल्द शुरू कराए जाएंगे। स्कूल खुलने तक स्रोत तैयार कराने की कोशि है।
एमएस तोमर, डीपीसी मुरैना
Published on:
12 May 2018 03:33 pm
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