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ड्राइवर ने खोला मौत के कुएं का राज, लेडी स्टंटमैन ऐसे खेलती है खतरों का खेल

जान हथेली पर रख मौत के कुएं में दौड़ाते हैं कार व बाइक, देखने वाले रह जाते हैं दंग. पहले जमीन खोदकर ईंटों का सात फीट का कुआं बनता था अब 25 फीट ऊंचे लकड़ी के कुएं में होते हैं स्टंट.

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ड्राइवर ने खोला मौत के कुएं का राज, लेडी स्टंटमैन ऐसे खेलती है खतरों का खेल

ड्राइवर ने खोला मौत के कुएं का राज, लेडी स्टंटमैन ऐसे खेलती है खतरों का खेल

ग्वालियर. मौत के कुएं में चलती गाड़ियों को देखकर अच्छे अच्छे दिल थाम लेते हैं, जहां स्टंटमैन जान हथेली पर लेकर गाड़ियां चलाते हैं, वहीं मौजूद दर्शक भी धडक़ने थाम कर मौत के कुएं में चलती गाड़ियां देखते हैं, ऐसे में जब मौत के कुएं में गाड़ी चलाने वाले स्टंटमैनों से बात की तो उन्होंने बताया कि किस तरह दिलेरी से वे गाड़ी चलाते हैं।

बड़ा सा मौत का कुंआ....उसके बीच तेजी से दौड़ती एक बुलेट, तीन मोटर साइकिल और दो कारें दौड़ाते स्टंटमैन। इस दृश्य को देखने वालों की धड़कनें थमी हुई हैं, थ्रिल और रोमांच के बीच जब ये राइड पूरी होती है तो इसे देखने वाले तालियां भी बजाते हैं और नोट भी लुटाते हैं। ग्वालियर व्यापार मेले में हर रोज यह नजारा देखने को मिलता है। मनोरंजन सेक्टर में बनाए गए मौत के कुएं में, जहां अपनी जान हथेली पर लेकर स्टंट करने वाले दर्शकों के बीच मोटर साइकिल के साथ कारें चलाते हुए देखे जा सकते हैं। चंद रुपयों को कमाने ये स्टंटमैन जगह-जगह लगने वाले मेलों में मौत के कुएं में स्टंट करते हैं। मौत के कुएं में स्टंट करने वालों का मानना है कि इन्हें देखने आने वाले दर्शक ही हमारे भगवान हैं। हमारी सालों की मेहनत और दर्शकों की तालियां और उनकी दुआएं सदा हमारे साथ रहती हैं, जिसके बलबूते ही हम इस जोखिम भरे काम को पूरा कर लेते हैं।

40 की स्पीड मेग्नेट का काम करती है

हाथरस निवासी बंटी (आलोक) परमार ने बताया कि मैं 27 साल से स्टंट कर रहा हूं। पहले सर्कस में ग्लोब जंप किया करता था। हाथरस के मेले से स्टंट की शुरुआत की थी। मौत के कुएं में बुलेट मोटर साइकिल पर स्टंट करता हूं। अभी तक गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, नेपाल आदि कई जगहों के मेले में जा चुका हूं। इसमें दिहाड़ी पर काम करते हैं। पहले मौत के कुएं में एक ही मोटर साइकिल चलती थी लेकिन अब एक साथ छह गाड़ियां चलने से कुआं भी बड़ा हो गया है। स्टंट करने के बाद जब लोग सेल्फी, वीडियो बनाते हैं तो अच्छा लगता है। यही हमारा हौंसला भी बढ़ाता है। जोखिम का यह काम तकनीक से करना पड़ता है। इसमें गाड़ी चलाते समय 40 की स्पीड मैग्नेट का काम करती है।

समय के साथ बदल गया मौत का कुआं

इटावा निवासी अजीज उल रहमान (पप्पू) खान ने बताया कि मौत के कुआं में स्टंट करते-करते 35 साल से अधिक का समय हो चुका है। समय के साथ-साथ मौत का कुआं भी बदलता जा रहा है। पहले जमीन खोदकर उसमें ईंटें लगाकर 7 फीट ऊंचाई का कुआं बनता था, लेकिन अब लकड़ियों से 25 फीट ऊंचा मौत का कुआं बनता है। अब में कुएं में कार चलाता हूं। पहले इस काम में कई लोग रहते थे, उनकी संख्या भी कम हो रही है।

कभी भी डर नहीं लगता

लखनऊ निवासी नित्या ने बताया कि मैं पांच वर्ष से मौत का कुआं में मोटर साइकिल पर स्टंट कर रही हूं। मेरा कोई गुरु नहीं है, ऊपर वाला ही मेरा गुरु है। मोटर साइकिल चलाते समय कभी भी डर नहीं लगा, वैसे भी ये काम दिलदारी का है और मैं इसे बगैर डरे पूरा करती हूं। एक दिन में करीब पांच चक्कर से ज्यादा करती हूं। हालांकि भविष्य में ये काम करने का मन नहीं है।

12 साल की उम्र से राइडिंग कर रहा हूं

हरदोई निवासी अरुण (अजय) कश्यप ने बताया मैंने 12 साल की उम्र से राइडिंग शुरू कर दी थी। मोटर साइकिल चलाते हुए अलग-अलग तरह के स्टंट करता हूं। मुझे लोगों की तालियां बहुत पसंद है, इससे काफी उत्साह बढ़ता है और मजा भी आता है। चूंकि अभी मेरी उम्र कम है, लेकिन आगे जाकर भी मैं यही काम करूंगा। मौत का कुआं का नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं, लेकिन उसमें हमारे स्टंट को सभी खासा पसंद करते हैं।

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