इस दौरान कर्मचारियों ने कहा कि प्रदेश सरकार समाज को विखंडित करने का कार्य कर रही है, जिसके कारण मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के पदोन्नति में आरक्षण समाप्त करने के निर्णय के विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन ने अपील प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सिर्फ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के भाई बहनों की ही वकालत की और उन्हें पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए पूरा प्रयास कर रहे हैं। यहां तक कि उन्होंने अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि कोई माई का लाल पदोन्नति में आरक्षण समाप्त नहीं कर सकता। कर्मचारी और अधिकारियों ने इसका विरोध किया एवं कोर्ट के आदेश के अनुसार वर्ष 2002 के बाद पदोन्नति में आरक्षण समाप्त कर इस दौरान की गई पदोन्नति को वापस लिए जाने की मांग की। सभी कर्मचारी और अधिकारियों ने हस्ताक्षर अभियान के दौरान हस्ताक्षर किए व इसे मुख्यमंत्री को भेजा।