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भागवत कथा श्रवण से मिलता है सभी तीर्थों का फल

- रामद्वारा में 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा प्रारंभ, कथा से पहले निकली शोभायात्रा

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भागवत कथा श्रवण से मिलता है सभी तीर्थों का फल

भागवत कथा श्रवण से मिलता है सभी तीर्थों का फल

ग्वालियर. जहां भागवत कथा होती है वहां समस्त तीर्थों का, समस्त नदियों का ,समस्त पवित्र क्षेत्रों का आगमन होता है। भागवत कथा में जाने से सारे तीर्थों का स्नान करने का पुण्य प्राप्त हो जाता है। उक्त विचार अंतराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के प्रमुख संत रामप्रसाद महाराज ने लक्ष्मीगंज स्थित रामद्वारा में शुक्रवार से शुरू हुई भागवत कथा में पहले दिन व्यक्त किये। उन्होंने आगे कहा कि श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान श्रवण का अवसर मनुष्य को बड़े पुण्य से प्राप्त होता है एवं इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति की सभी जरूरतें परमात्मा पूर्ण करते हैं। जैसे कल्पवृक्ष के नीचे जाने से सारी कल्पनाएं हकीकत में बदल जाती है वैसे ही श्रीमद्भागवत का श्रवण कलयुग में साक्षात कल्पवृक्ष है जो हमारी सभी इच्छाओं को पूर्ण करता है। जब जीवन में करोड़ों जन्मों का पुण्य उदय होता है तब भागवत कथा में जाने का अवसर प्राप्त होता है। भागवत सप्ताह से हमारा चिंतन, हमारा मनन, हमारी सोच, हमारी मन स्थितियां बदलती है। मन स्थिति बदलने की अगर कोई पाठशाला है तो वह श्रीमद्भागवत कथा है। श्रीमद्भागवत कथा से पूर्व शोभा यात्रा निकाली गई। शोभायात्रा रोकडिय़ा सरकार मंदिर से शुरू होकर गाजे-बाजे के साथ प्रमुख मार्गों से होती हुई कथा स्थल रामद्वारा पहुंची। कथा में आगे-आगे सैकड़ों महिलाएं पीले वस्त्र पहनकर सिर पर कलश धारण करकर चल रही थीं, श्रद्धालु लोग नाचते गाते चल रहे थे। जगह जगह पर श्रद्धालुओं ने भागवत का पूजन-अर्चन किया गया एवं भक्तों के लिए प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई।


बीमार मन का उपचार करती है भागवत कथा
मामा का बाजार, गरीब दास बाबा मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास पं.घनश्याम शास्त्री महाराज ने कहा कि भागवत कथा सुनने मात्र से ही प्राणियों का कल्याण हो जाता है। प्राणी कथा को जाने-अनजाने अथवा बिना चाहे भी सुनते हैं वह भगवान के सबसे अधिक प्रिय बन जाते हैं। उन्होंने कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि जब कहीं भी किसी स्थान पर कथा चल रहा हो और वहां जाने का मन न करें तो समझिए कि आपके अंदर तमोगुण की अधिकता है। अगर आप कथा सुनने के लिए पहुंच गए और सुनने में मन न लगे तो आपमें रजो गुण की अधिकता है, लेकिन जब आपको कथा सुनकर आनंद आने लगे सद्गुण है।