मंदिर के पुजारी बांकेलाल भारद्वाज ने बताया कि उनके पुर्वज भी मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे। इसका निर्माण किसने कराया, इसकी कोई जानकारी नहीं है। 25 वर्ष पूर्व मंदिर में मां गंगा की अष्टधातु की मूर्ति भी विराजमान थी। जिसके मुख से हमेशा ही गंगा रूपी जलधारा बहती रहती थी, लेकिन चोर उसे चुरा कर ले गए। सावन के महीने में यहां सर्प भी अक्सर दिखाई देता है जो महादेव के शिवलिंग के चारों तरफ कुंडली मारकर बैठ जाता है। ऐसी किवदंती है कि यहां वर्षों पूर्व किसी सिद्ध बाबा ने समाधि ली थी इस सर्प को उन्हीं का रूप माना जाता है। अभी तक इस सर्प ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है।