माधव राष्ट्रीय उद्यान : नए साल की शुरूआत करें प्रकृति के बीच
विंध्यांचल की वन से ढकी हुई नैसर्गिक पर्वत श्रेणियां, सुरम्य घाटियां व पहाडिय़ां, बड़ी-बड़ी झीलों, झरनों, खोह व भरकों को अपने में समेटे है शिवपुरी का माधव राष्ट्रीय उद्यान।
शिवपुरी। विंध्यांचल की वन से ढकी हुई नैसर्गिक पर्वत श्रेणियां, सुरम्य घाटियां व पहाडिय़ां, बड़ी-बड़ी झीलों, झरनों, खोह व भरकों को अपने में समेटे है शिवपुरी का माधव राष्ट्रीय उद्यान।
156 किलोमीटर क्षेत्र विस्तार वाले इस राष्ट्रीय उद्यान में अनेक मनोहारी दृश्यों के साथ स्वच्छंद विचरण करने वाले वन्यजीव, प्रत्येक पर्यटक का मन बरबस विमोहित कर लेते हैं। इस राष्ट्रीय उद्यान को वर्ष भर में कभी भी देखा जा सकता है।
पूरे राष्ट्रीय उद्यान में भ्रमण हेतु सड़के हैं। वन्य प्राणियों को देखने के लिए ऊंचे-ऊंचे वॉचटावर बनाए गए हैं। इस राष्ट्रीय उद्यान के अंदर सांख्य सागर और माधव सागर झीले हैं। जहां सैलानी पक्षी अक्सर सर्दियों में आकर डेरा जमा लेते हैं।
सेलिंग क्लब और इसके निकट ही बारादरी की सुंदरता सैलानियों की थकान हरने और विश्राम करने का बड़ा अच्छा स्थान है। सेलिंग क्लब के सामने बोट- हाउस दिखता है। बोट हाउस के पास पर्यटक ग्राम व भदैया कुंड है।
मई 1979 में क्रोकोडायल बैंक मद्रास से 10 मगरमच्छों को लाकर सांख्या सागर झील में छोड़ा गया था। बाद में चांदपाठा झील में भी मगरों को पाला गया। शिवपुरी में नौकायन सन् 1978 के आसपास घटी नौकायन दुर्घटना के बाद बंद कर दी गई थी।
इस दुर्घटना में एक ही परिवार के कई सदस्य एक साथ काल कवलित हो गए थे। तात्कालीन पर्यटन मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के द्वारा सन् 2006 में इसे पुन: प्रारंभ कर दिया गया है तथा यहां विशेष प्रकार की मोटर वोट भी पर्यटकों के मनोरंजन के लिए लाई गईहै।
पूर्व में यह राष्ट्रीय उद्यान पूर्व ग्वालियर महाराजा सिंधिया की शिकारगाह था। आम आदमी का वन में प्रवेश निषेध था। सन् 1917 में महाराजा माधवराव सिंधिया प्रथम ने इसे और सुंदर बनाने के लिए मनिहर नदी पर श्रंृखलाबद्ध निर्माण कराए। इसमें तीन झीलों जाधव सागर, सांख्या सागर एवं माधव सागर का निर्माण कराया गया।
जाधव सागर राष्ट्रीय उद्यान सीमा के बाहर है पर बाद की दोनों झीलें राष्ट्रीय उद्यान की सीमा क्षेत्र में आती हैं। उन्होंने शूटिंग बॉक्स व वॉच टॉवरों का निर्माण भी कराया। उन दिनों झीलों में कईप्रकार की विशाल हाउस-वोट तैरती रहती थीं, जिन्हें भदैया कुंड स्थित वोट हाउस नामक स्थान पर रखा जाता था।
माधव राष्ट्रीय उद्यान में 30 से अधिक तेंदुएं हैं, जबकि नीलगाय, हिरण, चीतल, जंगली सूअर सहित कईवन्यजीव मौजूद हैं।