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अधिवक्ता पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि ग्वालियर निवासी नरेंद्र शर्मा (परिवर्तित नाम) के पिता का स्वास्थ्य खराब हो गया था। पिता ने अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए नरेंद्र का विवाह करो की इच्छा जाहिर की। इसी बीच भिण्ड से लड़की के पिता रिश्ता लेकर आए। लड़की गृह कार्य में दक्ष होना बताकर संबंध तय किया। एक जुलाई 2014 में नरेंद्र का विवाह हो गया था। विवाह के कुछ माह तक दोनों के बीच दांपत्य संबंध नहीं बने। उसकी पत्नी पहली बार ससुराल से विदा होकर मायके चली गई। नरेंद्र के पिता का निधन हो गया तब वह पत्नी को फिर घर लेकर आ गया।
पत्नी को दिए थे मौके, पर नहीं कराया परीक्षण
● पति ने जो आरोप लगाए थे, उनके खंडन के लिए पत्नी को कई मौके दिए। कोर्ट ने मेडिकल परीक्षण कराकर रिपोर्ट न्यायालय में पेश करने को कहा, लेकिन पत्नी मेडिकल परीक्षण कराने नहीं पहुंची।
● मेडिकल परीक्षण नहीं कराना से धारणा बनती है कि पति ने जो आरोप लगाए, वह सही हैं। एक सितंबर 2023 से दोनों पति-पत्नी नही हैं।
डॉक्टर ने जांच कर बताया अक्षम
लंबे समय के बाद दोनों के बीच दांपत्य संबंध बने, जिसके बाद पत्नी को काफी पीड़ा हुई। नरेंद्र ने पत्नी को स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास लेकर पहुंचा। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड भी कराया। डाक्टर ने जांच के बाद उसकी पत्नी को स्त्री नहीं बताया। डाक्टर ने कहा कि उसकी पत्नी के जननांग पूर्ण रूप से विकसित नहीं है। उसके बाद पत्नी ने पूरी सच्चाई बताई कि आपरेशन से जननांग विकसित कराए हैं। मेडिकल जांच में पत्नी के किन्नर होने का खुलास होने के बाद कुटुंब न्यायालय में 2021 में आवेदन लगाया।
Published on:
03 Sept 2023 12:05 pm
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