
मानस भवन के मामले में शासन से मांगा मार्गदर्शन, आउटसोर्स एजेंसी के प्रस्ताव को लौटाया वापस
ग्वालियर। मेयर इन काउंसिल (एमआइसी) की शनिवार को बाल भवन के टीएलसी सभागार में महापौर डॉ शोभा सिकरवार की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में फूलबाग स्थित तुलसी मानस प्रतिष्ठान (मानस भवन) में व्यवसायिक गतिविधियों की स्वीकृति देने के मामले को परिषद के माध्यम से शासन को भेजे जाने का निर्णय लिया गया। क्योकि इस मामले में पूर्व में शिकायतें होने पर एमआइसी ने कोई निर्णय न लेते हुए शासन से मार्गदर्शन लेने के लिए कहा है। इसके साथ ही बैठक में चंबल से पानी लाने की परियोजना के टेंडर करने की स्वीकृति, आउटसोर्स एजेंसी की निविदा स्वीकृति की शर्ते गोलमोल देखकर उसे वापस लौटाने सहित नौ बिंदुओं पर चर्चा हुई। इस दौरान निगमायुक्त हर्ष सिंह, अपर आयुक्त आरके श्रीवास्तव, सिटी प्लानर पवन सिंघल, एमआइसी सदस्य अवधेश कौरव, नाथूराम ठेकेदार, सुरेश सिंह सोलंकी, सुनीता अरुणेश कुशवाह, आशा सुरेंद्र चौहान, महेंद्र कुमार अग्रवाल सहित अन्य मौजूद रहे।
बैठक में इन बिन्दुओं पर सहमति
-आउटसोर्स एजेंसी की निविदा स्वीकृति के संबंध में प्रस्ताव की शर्ते गोलमोल देखकर एमआईसी सदस्यों ने शर्ते में सुधार कर तीन महीने में ठेके की प्रक्रिया पूरी करने की बात कहते हुए उसे वापस लौटा दिया गया।
-चंबल से पानी लाने की परियोजना के जल्द से जल्द टेंडर करने को स्वीकृति प्रदान की गई।
-एसडीएमएफ स्टोर्म वाटर निकासी के लिए कुलदीप नर्सरी के पास चेतकपुरी महल रोड से मानस भवन के पीछे फूलबाग तक नाला निर्माण के व्यय की स्वीकृति दी गई।
-आउटसोर्स एजेंसी की निविदा स्वीकृति के संबंध में एवं समयावधि व व्यय स्वीकृति के संबंध में मिले निगमायुक्त के प्रतिवेदन पर चर्चा करने के बाद तीन माह की समयावधि बढ़ाकर पुन: नई प्रक्रिया से टेंडर करने को स्वीकृति दी।
-निगम के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों पर आउटसोर्स द्वारा सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराने के मामले में भी तीन माह की समयावधि बढ़ाने की स्वीकृति प्रदानी की गई। पूर्व में भी एक माह का समय बढ़ा दिया गया था।
-निगम की भूमि पर नवीन वर्कशाप, मिनी वर्कशाप व फायर ब्रिगेड स्टेशन आदि निर्माण कार्य के व्यय को भी स्वीकृति एमआईसी ने दी।
-सिटी सेंटर स्थित सालासर माल के पीछे बनी मल्टीलेवल पार्किंग के हाल क्रमांक-1 ब्लाक एक को लीज पर आवंटित करने का प्रस्ताव पर सदस्यों ने अधिकारियों से वर्षों पुरानी गाइडलाइन के हिसाब से स्वीकृति मांगते हुए कहा कि वर्तमान वित्तीय वर्ष की कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब से निगम को ज्यादा राजस्व मिल सकता है। इसलिए वर्तमान गाइडलाइन के आधार पर लीज की राशि तय कर टेंडर प्रक्रिया की जाए।
Published on:
15 Apr 2023 10:52 pm
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