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मॉब लिंचिंग और सोशल मीडिया के दिखाए साइड इफेक्ट्स

आजकल मॉब लिंचिंग की घटनाएं अक्सर सुनाई देती हैं। कभी बच्चा चोरी के नाम पर तो कभी किसी के नाम पर। मॉब लिंचिंग का शिकार अक्सर निर्दोष लोग भी हो जाते हैं। ऐसी घटनाओं से बचने के लिए अवेयरनेस जरूरी है।

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मॉब लिंचिंग और सोशल मीडिया के दिखाए साइड इफेक्ट्स

मॉब लिंचिंग और सोशल मीडिया के दिखाए साइड इफेक्ट्स

ग्वालियर. आजकल मॉब लिंचिंग की घटनाएं अक्सर सुनाई देती हैं। कभी बच्चा चोरी के नाम पर तो कभी किसी के नाम पर। मॉब लिंचिंग का शिकार अक्सर निर्दोष लोग भी हो जाते हैं। ऐसी घटनाओं से बचने के लिए अवेयरनेस जरूरी है। वर्तमान समय में समाज में घट रही इस तरह की ज्वलंत समस्याओं को कुछ मिनटों के रोल प्ले के माध्यम से समाज और युवा पीढ़ी को संदेश देने की कोशिश की। मौका था अंतरजिला विश्वविद्यालय युवा उत्सव के दूसरे दिन गुरुवार का। इस दिन 6 विधाओं के तहत 29 टीमों ने भाग लेकर अपने टैलेंट का परिचय दिया।

एक चिट्ठी नाम से हुई एकांकी में युवा कलाकारों ने शिक्षा का महत्व बताया। इसमें बताया कि गांव के एक गरीब, अनपढ़ माता-पिता के पास फौज से एक चिट्ठी आती है, जिसे पढ़वाने के लिए वो गांव के चौधरी सहित कई लोगों के पास जाता है। दो-तीन दिन गुजरने पर भी वह चिट्ठी कोई नहीं पढ़ता। इसके उलट उस व्यक्ति से काफी काम करा लिया जाता है। अंत में एक स्कूली छात्रा उस चिट्ठी को पढ़ती है, जिसमें उनके बेटे के शहीद होने की सूचना होती है, तब उन्हें अपने अनपढ़ होने का पछतावा होता है। नाटक के अंत में करुण रस ने सबको भाव-विभोर कर दिया।

मंदबुद्धि बच्ची सरोगेट मदर की

रबड़ी नाटक के माध्यम से सरोगेसी की समस्या को उजागर किया गया। इसमें बताया गया कि एक महिला सेरोगेट मदर बनना चाहती है। वह जिस बच्ची जन्म देती है, वो मंद बुद्धि होती है, उसके असली माता-पिता उस बच्ची को अपनाने से मना कर देते हैं। काफी परेशानी के बाद वो महिला ही उस बच्ची को पालना स्वीकार करती है।