जीवाजी विश्वविद्यालय की रिसर्च स्कॉलर अंजली शर्मा......
एमआईटीएस के इलेक्ट्रॉनिक डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष प्रो. प्रमोद कुमार सिंघल ने बताया, रिसर्च रिपोर्ट को शहर के प्रतिष्ठित चिकित्सक और अन्य शोध संस्थानों को भेजा जाएगा, ताकि अनुभवीय चिकित्सकों की टिप्पणी जानी जा
सके ।
शोधार्थी एमआईटीएस में इलेक्ट्रॉनिक्स शाखा में एम. टेक अंतिम वर्ष के छात्र राहुल देव शर्मा और जीवाजी विश्वविद्यालय की रिसर्च स्कॉलर अंजली शर्मा ने बताया कि विभिन्न मेगाहर्ट्स स्तर पर एक दम स्वस्थ्य चूहों पर अत्याधुनिक लेब में मोबाइल रेडीएेशन की विभिन्न स्तरों से प्रभावित किया गया।
एक माह लगातार चले परीक्षण के बाद साबित हुआ कि चूहों के ब्लड प्रोफाइल पर विशेषतौर पर बुरा असर पड़ा है।
जिन चूहों पर ये परीक्षण किया गया, वे मानव प्रजाति के काफी नजदीक होते हैं। दोनों रिसर्च स्कॉलर का मार्गदर्शन इलेक्ट्रॉनिकी इंजीनियर प्रमोद कुमार सिंघल ने किया।
इसलिए किया चूहों पर प्रयोग
चूंकि चूहों के रक्त और मनुष्य के रक्त में काफी समानता है, खास तौर पर आरबीसी, डब्ल्यूवीसी और प्लेटलेट्स आदि में। इसलिए मोबाइल रेडीएेशन का मनुष्य पर असर पडऩा स्वाभाविक है।
इस तरह असंतुलित होता है ब्लड प्रोफाइल
* ब्लड में आरबीसी की मात्रा में गिरावट...
* डब्ल्यूवीसी (व्वाइट ब्लड काप्र्सल्स) की मात्रा में इजाफा ...
* हीमोग्लोबिन की मात्रा में कमी....
* 70 फीसदी प्लेटलेट्स की मात्रा में कमी आती है हाईफ्रीक्वेंसी के मोबाइल से...
* हेमेटॉक्रिट की मात्रा मेल विजिटर में कम हो जाती है..
* मीन काल्र्सक्यूलर हीमोग्लोबिन में जबरदस्त इजाफा ...
* लिपिड पेरॉक्साइडेज में इजाफा ...