20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

MP ELECTION 2018: साढ़े तीन दशक में नाला बन गई मुरार नदी, नमामि गंगे योजना में किया गया था शामिल

MP ELECTION 2018: साढ़े तीन दशक में नाला बन गई मुरार नदी, नमामि गंगे योजना में किया गया था शामिल

3 min read
Google source verification
murar river gwalior

MP ELECTION 2018: साढ़े तीन दशक में नाला बन गई मुरार नदी, नमामि गंगे योजना में किया गया था शामिल

ग्वालियर। बैसली नदी की सहायक कही जाने वाली मुरार नदी, जो शहर के बीच से होकर गुजरती है, इसमें साढ़े तीन दशक पूर्व साफ पानी बहता था। इस नदी को नमामी गंगे योजना में शामिल कर कायाकल्प करने के लिए करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट बने, लेकिन वे धरातल पर नहीं उतर सके। अब यह नदी अतिक्रमणकारियों के कब्जे में है, जहां आलीशान मकान बन गए हैं।

इस नदी पर प्रदेश सरकार और जनप्रतिनिधियों और नगर निगम ने ध्यान दिया होता तो यह मुरार के आसपास के क्षेत्रों की प्यास बुझाकर जीवन दायिनी नदी साबित होती, लेकिन अधिकारियों की वजह से और बारिश कम होने व सीवर लाइनें नदी में खुलने से यह नाला बनकर रह गई है। इस नदी में साफ पानी बहाने और सौन्दर्यीकरण के लिए चुनावों में मुद्दा तो उठा, लेकिन काम कुछ नहीं हुआ। इस बार फिर यह शहर का अहम चुनावी मुद्दा हो सकता है।

सातऊं की पहाडिय़ों पर है उद्गम स्थल
सन 1754 से पूर्व की यह नदी सातऊं की पहाडिय़ों से निकलती है। इस नदी पर चार बांध कछाई, जड़ेरूआ, बहादुरपुर, गुठीना पर बने हैं। यह नदी जड़ेरूआ से रमौआ बांध के रास्ते में डिफेंस एरिया नाला, काल्पी ब्रिज, नदी पार टाल, गांधी रोड, मेहरा गांव नाला, नॉर्थ मेहरा गांव नाला, साउथ हुरावली ब्रिज, पृथ्वी नगर, सिरोल गांव, डोंगरपुर रोड, अलापुर नाला, डोंगरपुर रोड जंक्शन, बायपास ब्रिज से गुजरती है। 1985 से पूर्व इस नदी में साफ पानी बहता था।

एनजीटी में पहुंचा था मामला
नदी का मामला एनजीटी में पहुंचा था, वहां से नदी पर बने मकानों को हटाकर लोगों को विस्थापित करने और नदी का पुनरुद्धार करने के आदेश दिए थे। निगम ने विस्थापित तो नहीं किए, लेकिन वहां से कुछ मकानों को हटाया, बाद में यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

नदी पर बना डाले आलीशान मकान
मुरार नदी की वर्तमान में यह हालत है कि नदी के कुछ हिस्से को पाटकर लोगों ने उस पर आलीशान मकान बना लिए हैं। लगभग साढ़े तीन सौ से अधिक मकान नदी पर बन गए हैं।

यह होना था काम

साफ पानी बहाने 482 करोड़ की योजना तैयार की गई थी
चार साल पूर्व केन्द्रीय जल आयोग की टीम ग्वालियर आई थी, उसने नदी का भ्रमण कर माना कि यह नदी मृत नहीं है, टीम ने इसे मूल स्वरूप में लाने की स्वीकृति दी। इसे गंगा स्वच्छता अभियान में शामिल किया गया और नमामि गंगे की तर्ज पर साफ कर साफ पानी बहाने के लिए 482 करोड़ रुपए की विकास योजना तैयार की गई थी। इसके निरीक्षण के लिए केन्द्रीय जल बोर्ड से 2017 में टीम आई थी, जिसने जड़ेरुआ बांध तक का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट केन्द्रीय भू-जल बोर्ड को दी थी।

डीपीआर में घटी राशि
कुछ समय पूर्व नगर निगम ने रमौआ बांध से जड़ेरूआ बांध तक नदी का जीर्णोंद्धार करने के लिए 317 करोड़ रुपए की डीपीआर केन्द्रीय जल आयोग को भेजी थी। वहां से डीपीआर को संशोधित कर लागत कम करने के निर्देश मिले तो नगर निगम ने डीपीआर में संशोधन कराकर प्रोजेक्ट की लागत 166.19 करोड़ रुपए कर दी, जिसको पांच माह पूर्व भेजा, इसके बाद कुछ काम तो शुरू हुआ, लेकिन बीच में वह भी बंद हो गया। इस नदी में साफ पानी हमेशा बहता रहे इसके लिए जगह-जगह स्टॉप डैम भी बनाए जाने थे।

6 फुट ओवर ब्रिज और 4 स्टॉप डैम बनेंगे
साढ़े बारह किलो मीटर लंबी इस नदी के आस-पास कुछ गांव और बस्तियां बसी हुई हैं। वहां के लोग आसानी से नदी को पैदल पार कर सकें, इसके लिए 6 फुट ओवर ब्रिज का निर्माण किया जाना प्रस्तावित किया गया है। इस पर 5.08 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाएगी। नदी के एरिया में 4 स्टॉप डैम भी बनाए जाना तय किए गए थे।