
mp election result 2018:पेट्रोल-डीजल के रेट में आई भारी कम, अब ये हो गए है दाम
शिवपुरी। पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल-डीजल के दाम में कमी होना शुरू हुई और लगभग हर दूसरे-तीसरे दिन रेट में कुछ पैसे कम हो रहा है। एक तरफ चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है, ऐसे में पेट्रोल-डीजल के दाम में कमी होने से आमजन यही मान कर चल रहा है कि चुनाव का असर है। जबकि वास्तविकता में यह गिरावट अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम होने से आई है। सरकार ने चुनाव नजदीक होने की वजह से इतनी रियायत कर दी है कि इन पर टैक्स नहीं बढ़ाया।
गौरतलब है कि पेट्रोल के दाम एक समय 89 रुपए प्रति लीटर तक जा पहुंचे थे, जो अब घटकर 79 रुपए तक आ गए। दामों में हो रही गिरावट को देखते हुए आमजन यह मान कर चल रहा है कि विधानसभा चुनाव में अब कुछ दिन ही शेष रह गए हैं, इसलिए इनके रेट कम किए जा रहे हैं। मतदान के बाद फिर से स्थिति वहीं पर पहुंच जाएगी। जबकि इसके पीछे की सच्चाई यह है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 86 डॉलर से घटकर 62 डॉलर प्रति बैरल आ गई है। कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के अनुपात में जितनी राहत आमजन को मिलनी चाहिए थी, वो नहीं मिल सकी।
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महत्वपूर्ण बात यह है कि इस गिरावट को भले ही अंतर्राष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जा रहा है, लेकिन हकीकत यह भी है कि जब पिछले वर्षों में बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटी थी, तब सरकार ने रातोंरात उस पर इतना टैक्स बढ़ा दिया था कि आम उपभोक्ता को कोई राहत नहीं मिल पाई थी।
यह बात उस समय भी उठी थी, जब देश भर में ट्रक ऑपरेटर यूनियन ने भी सरकार पर आरोप लगाया था कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम हुई थीं, तब सरकार ने राहत देने की बजाए टैक्स बढ़ाकर अपनी तिजोरी भरी थी। इस बार जब तेल के दाम कम हुए हैं तो सरकार ने टैक्स न बढ़ाकर आमजन को कम ही सही राहत दी है। हालांकि कांग्रेस इसे चुनावी फंडा मान रही है।
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अभी तो तीन- चार दिन और कम रहे दाम
बायपास रोड स्थित पेट्रोल पंप पर शुक्रवार की दोपहर 12 बजे एक बाइक सवार ने पंप कर्मचारी से पूछा कि आज पेट्रोल का क्या रेट है, तो उसने बताया कि 79 रुपए है, तो बाइक सवार बोला कि अभी तो तीन-चार दिन और कम होने की उम्मीद है। इस पर पंप कर्मचारी बोला कि अभी तक तो पैसों में कम हो रहा था, अब 28 नवंबर तक सीधे एक रुपए भी कम हो सकता है। यानि आमजन के साथ-साथ पंप कर्मचारी भी यह मान रहे हैं कि चुनावी फेर में रेट कम हो रहे हैं।
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जब कर्नाटक में चुनाव थे, तब भी पीएम ने पेट्रोलियम कंपनियों के साथ बैठक करके रेट कम किए थे। यह सिर्फ चुनावी जुमलेबाजी है और 10-20 पैेसे कम किए जा रहे हैं। मतदान होने के बाद फिर से इनके रेट बढ़ेंगे। मप्र में सबसे अधिक टैक्स लिया जा रहा है, जिसे कम किया जाना चाहिए।
अजीत भदौरिया, प्रवक्ता कांग्रेस
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में जब मूल्योंं में गिरावट आई तो सरकार ने भी आमजन को राहत दी है। इससे पेट्रोल पंप संचालकों को तो नुकसान हुआ है, लेकिन देश की जनता को लाभ हो रहा है। इससे पहले भी जब कच्चे तेल के रेट कम हुए थे, तो आमजन को ऐसी ही राहत दी थी।
धैर्यवर्धन शर्मा, भाजपा पैनलिस्ट
बीते कुछ दिनों से रेटों में कमी आई है, और इसकी वजह अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में गिरावट है। लेकिन जिस अनुपात में कच्चे तेल के दाम कम हुए है, उस अनुपात में आम उपभोक्ता को राहत नहीं मिली है। लोग तो इसे चुनावी राहत ही मानकर चल रहे हैं।
समीर गांधी, पेट्रोल पंप संचालक
Published on:
24 Nov 2018 04:02 pm
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