
स्वर्ण रेखा के सहायक नाले को मिट्टी से पाटा; जोनल ऑफिसर के विरोध के बाद भी अफसरों ने बांट दीं अवैध मंजूरियांघनी बस्ती 'रानीपुरा' पर डूब का संकट
ग्वालियर के ललितपुर हल्के में चेतकपुरी के पास नगर निगम ने 2 करोड़ 19 लाख रुपए की लागत से नाले के निर्माण कर दिया है और निगम ने ठेकेदार को इस राशि का भुगतान भी हो गया। लश्कर तहसीलदार रानीपुरा पुलिया से चेतकपुरी के बीच नाले का निरीक्षण किया तो मौके पर निर्माण नहीं था। जो निर्माण मिला, वह कॉलोनाइजर ने किया। नगर निगम ने कागजों में नाले का निर्माण कर दिया और मौके से गायब भी। नाले की चौड़ाई 30 मीटर थी, वह सिमट कर 4 फीट का रह गया। नाले का रास्ता भी बदल दिया। 90 डिग्री के एंगल में घुमा दिया, जिसे बदलने का अधिकार नहीं था। अब इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा के बाद लश्कर तहसीलदार ने नगर निगम को पत्र लिखा है। जब निगम का जवाब नहीं आया तो दो स्मरण पत्र भी जारी किए गए हैं। नाले का प्रवाह रोकने की वजह से रानीपुरा में बारिश के दौरान पानी भरने की संभावना भी बताई है।
दरअसल विक्की फैक्ट्री, रानीपुरा होते हुए स्वर्ण रेखा नदी के लिए एक नाला आता था। इस नाले को अंडर ग्राउंड करने के लिए चेतकपुरी रोड, माधव नगर, बसंत विहार रोड होते हुए स्वर्ण रेखा नदी तक पाइप लाइन बिछाई गई है। नाले के निर्माण के लिए सड़क की खोदाई की गई थी। बार-बार धंसक रही सड़क की वजह से पूरे निर्माण पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी बीच नगर निगम का नया फर्जीवाडा़ खुल गया। रानीपुरा से चेतकपुरी के बीच कागजों में नाले का निर्माण कर दिया।
इन सवालों के जवाब मांगे के नगर निगम से
-तहसीलदार ने पूछा है कि जब निर्माण बिल्डर को करना था, तो संबंधित कंपनी को यह करोड़ों रुपए किस आधार पर किया गया।
-रानीपुरा से आ रहे नाले के बहाव क्षेत्र में भारी मात्रा में मिट्टी खोदकर डाल दी है, जिससे पानी का रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो चुका है।
- जनविरोधी कार्य करने वाले बिल्डर के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध कराया जाए।
नाले पर दे दी भवन की अनुमति
ललितपुर ग्राम के सर्वे क्रमांक 243 से 250 नगर निगम ने कॉलोनी निर्माण की अनुमति दी है। नाले पर भवन निर्माण की अनुमति दे दी। बेसमेंट और 4 मंजिला भवन की अनुमति दी गई।
जोनल ऑफिस ने माना किया था। जोनल अवगत कराया कि प्रस्तावित भवन निर्माण की स्वीकृति प्राकृतिक रूप से बह रहे नाले के ऊपर चाही जा रही है, जो किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। इसके बावजूद, नगर निगम के जिम्मेदारों ने सारे नियमों को दरकिनार करते हुए 11 फरवरी 2026 को को 2 मंजिला बेसमेंट (तलघर), चार मंजिला भवन और टेरेस निर्माण की अनुमति जारी कर दी।
- अब हैरान करने वाली बात यह है कि निगम ने कॉलोनाइजर को जो अनुमति दी है, उसमें शर्त रखी है कि 3 मीटर चौड़ा आरसीसी कवर्ड नाला खुद कॉलोनाइजर बनाएगा और इस नाले की भूमि का स्वामित्व भी उसी का रहेगा। नगर निगम ने 2.19 करोड़ का भुगतान नाले के नाम पर किया है।
Updated on:
4 Jun 2026, 11:13 AM IST
Published on:
4 Jun 2026, 11:13 AM IST
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