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स्ट्रीट लाइट पर पक्ष-विपक्ष के पार्षदों ने अधिकारियों को सुनाई खरी-खोटी, बोले स्मार्ट सिटी में हुआ भ्रष्टाचार

अभियाचित बैठक में 30 दिन में लाइटें सही करने का दिया गया समय

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nagar nigam parishad meeting in gwalior

स्ट्रीट लाइट पर पक्ष-विपक्ष के पार्षदों ने अधिकारियों को सुनाई खरी-खोटी, बोले स्मार्ट सिटी में हुआ है करोड़ों का भ्रष्टाचार

ग्वालियर। शहर में एलईडी लाइटें लगाने में करोड़ों रुपए का घोटाला हुआ है, इसलिए जिम्मेदार अधिकारी की जांच कराकर सर्विस रिकॉर्ड में भ्रष्टाचार दर्ज कराकर कार्रवाई की जाए। यह बात शुक्रवार को जलविहार स्थित निगम परिषद में विपक्ष द्वारा बुलाई गई अभियाचित बैठक में भाजपा-कांग्रेस (दोनों दलों) के पार्षदों ने एलईडी लाइट व सालों से एक ही सीट पर जमे अधिकारियों को लेकर विरोध जताते हुए कही। जिस पर आयुक्त द्वारा सफाई देते ही दोनों ही दल कमजोर पड़ गए और सभापति ने सभी लाइटों को एक माह में दूरस्त करने व वार्ड वाइज लाइटों की व्यवस्था करने का समय दिया। निगमायुक्त ने 25 जून तक स्थिति बदलने का आश्वासन दिया। वहीं बैठक में दूसरे बिंदु पर चर्चा के दौरान पक्ष-विपक्ष के पार्षदों ने बिना योग्यता के पद दिए जाने अधिकारियों पर सीधा अरोप लगाते हुए बहस शुरू कर दी, इसे देख सभापति ने परिषद को 15 मई दोपहर तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

दीक्षित बोले स्मार्ट सिटी की दुर्दशा के लिए सिंधिया जिम्मेदार
पार्षद बृजेश श्रीवास व अन्य पार्षदों ने विधायक सतीश सिकरवार व महापौर शोभा सिकरवार को सीधे टारगेट करते हुए कहा कि चुनाव आने वाले है इसलिए इनके ही क्षेत्र में कार्य हो रहे है। जिस पर विधायक प्रतिनिधि कृष्णराव दीक्षित ने केन्द्रीय मंत्री सिंधिया को स्मार्ट सिटी की वजह से दुर्दशा होने की बात पर सदन में हंगामा खड़ा कर दिया। सदन में आरोप प्रत्यारोपों को देखकर सभापति ने व्यक्तिगत चर्चा न करने की बात कहकर मामले को शांत करवाया।

सभी पार्षद एकजुट होकर करें विकास कार्य, वरना दतिया निकल जाएगा आगे
निगम परिषद में पहुंचे विधायक प्रवीण पाठक के लिए 10 मिनट सदन स्थगित कर स्वागत किया गया। इस दौरान विधायक ने कहा सभी 66 पार्षद आपसी मनमुटाव भूलाकर विकास कार्य के लिए काम करें। यदि पार्षदों में सहमति नहीं मिली तो ग्वालियर काफी पिछड़ जाएगा और दतिया विकास में आगे निकल जाएगा। विधायक ने कहा जब हम जनप्रतिनिधि के रूप में इंदौर,भोपाल व जबलपुर सहित अन्य शहरों में जाते हैं तो लोग पूछते है ग्वालियर विकास में अब क्यो पिछड़ रहा है।

पिछडऩे का कारण वर्षों से एक ही सीट पर अधिकारी मठाधीश की तरह जमे हुए हैं। इन्हें हटाने की कोशिश भी करें तो यह अब यह रिश्तेदारों से फोन लगवाते है। आज नियमों के विपरित विनियमित अधिकारी को जेडओ, सहायक नोडल व अधिकारी बना दिए है। सभापति से कहा सभी पार्षदों को इंदौर की परिषद का भ्रमण कराया जाए। साथ ही ग्वालियर से लोग अब पलायन कर रहे हैं,यही हाल रहा तो निगम में मेरा बेटा भी बाबू बने और उसे कमिश्नर प्रमोट करके अधिकारी बना देंगे।