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ग्वालियर महापौर महिला; बड़े नेता पत्नी के लिए कर रहे दावेदारी

भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में सामने आए नाम

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nagareey nikaay chunaav

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ग्वालियर. नगरीय निकाय चुनाव में महापौर पद के आरक्षण की स्थिति साफ होते ही भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस में दावेदार महिलाओं के नाम सामने आने लगे हैं। दोनों ही पार्टियों के नेताओं ने अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में उतारने के लिए समीकरण बैठाना शुरू कर दिए हैं। कोई भोपाल तो कोई दिल्ली की दौड़ लगाकर पैनल में अपनी पत्नी का नाम जुड़वाने की कवायद में जुट गया है। ग्वालियर महापौर सीट सामान्य महिला होने के बाद अब दोनों ही पार्टियों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है, क्योंकि पैनल में सिंगल नाम आएगा नहीं और फिर भोपाल स्तर से ही नाम का फैसला होगा।

भाजपा से ये नाम आए सामने
भारतीय जनता पार्टी से जो नाम सामने आए है उनमें पूर्व मंत्री माया सिंह को सबसे ज्यादा प्रबल दावेदार माना जा रहा है। साफ-सुथरी छवि की है और उनकी राजनीति का अनुभव भी लंबा है, लेकिन उनके आड़े उम्र आ सकती है। इसके अलावा सुमन शर्मा, पूर्व पार्षद, एमआईसी सदस्य और महिला मोर्चा की महामंत्री हेमलता भदौरिया, वीरा लोहिया और अंजलि रायजादा भी दौड़ में शामिल में है। पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता का नाम भी चर्चा में आया है, लेकिन भाजपा छोड़कर फिर से शामिल होने से उनकी छवि प्रभावित हुई है। महापौर की सीट सामान्य होने से कुछ प्रबल दावेदार महिलाएं दौड़ से बाहर हो गई।

कांग्रेस से हो सकती है दावेदार
कांग्रेस पार्टी से जो दावेदार महिलाओं के नाम सामने आ गए हैं उनमेंं विधायक डॉ. सतीश सिंह सिकरवार की पत्नी शोभा सिकरवार, जिला अध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र शर्मा की पत्नी पूर्व पार्षद रीमा शर्मा, कुसुम शर्मा और वरिष्ठ कांग्रेस नेता रश्मि पंवार शर्मा शामिल है। इसके अलावा विधायक प्रवीण पाठक की पत्नी संध्या पाठक और कांग्रेस प्रदेश महासचिव सुनील शर्मा की पत्नी अलका का नाम भी सामने आए है। यदि ऐसा होता है तो कांग्रेस की महापौर पद की प्रत्याशी का नाम भोपाल से तय होगा। रश्मि संभवत: प्रत्याशी पद से हट सकती है क्योंकि वे आगामी विधानसभा के टिकट के लिए तैयारी में जुटी है।

भाजपा में भी मुसीबत कम नहीं
पार्षद और महापौर पद टिकट वितरण के लिए भारतीय जनता पार्टी में मुसीबत कम नहीं है। क्योंकि यहां सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का दखल हो सकता है। यदि ऐसा रहा तो अंदरूनी विरोध हो सकता है।

कांग्रेस में दिग्विजय सिंह पर दारोमदार
नगरीय निकाय चुनाव का दारोमदार राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह के कंधों पर रहेगा। ग्वालियर-चंबल के नेताओं और पदाधिकारियों की बैठक लेकर दिग्विजय सिंह ने यह साफ भी कर दिया था। इसलिए महापौर और पार्षद के टिकट में उनका हस्तक्षेप रहेगा और इससे कांग्रेस के कुछ नेताओं के अरमानों पर पानी फिरने की पूरी संभावना है।


भाजपा: सर्वे के आधार पर होगा नाम तय
- महापौर पद के प्रत्याशी का नाम भोपाल से तय होगा। जो नाम आएंगे उनका सर्वे कराया जाएगा और जिसका जनाधार सबसे ज्यादा होगा उसको टिकट दिया जाएगा। दावेदारी के लिए जो नाम आएंगे उनको भोपाल वरिष्ठ नेतृत्व के समक्ष भेज दिया जाएगा।
- कमल माखीजानी, जिलाध्यक्ष भाजपा

कांग्रेस: रायशुमारी से चुना जाएगा नाम
- कांग्रेस महापौर पद की दावेदार महिलाओं के नाम पैनल बनाकर भोपाल भेज जाएंगे। इन नामों की रायशुमारी कर नाम को चुना जाएगा। नामों पर विचार करने के लिए विधायक, जिलाध्यक्ष, पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकर चर्चा की जाएगी, उसके बाद नाम भोपाल भेजे जाएंगे।
- डॉ. देवेन्द्र शर्मा, जिलाध्यक्ष

सामाजिक संगठन भी तैयार थे दावेदार उतारने को
नगरीय निकाय चुनाव में शहर के सामाजिक संगठन भी अपने प्रत्याशी को मैदान में उतारने को तैयार थे। अग्रवाल समाज की ओर से मुकेश अग्रवाल अपनी पत्नी आभा अग्रवाल को दावेदार के रूप में चुनाव में उतारने के लिए तैयारी शुरू कर दी थी। इस दौरान समाज को एक जुट करने के लिए स्थानीय स्तर पर कई कार्यक्रम भी आयोजित किए थे।


दो बार महिला महापौर वो भी भाजपा से
नगर निगम के इतिहास में अब तक दो बार महिला महापौर चुनी गई है और दोनों ही बार ये महिला भारतीय जनता पार्टी से थी। सबसे पहली बार अरुणा सैन्या महापौर बनी थी जिनका कार्यकाल सन् 1995 से 2000 के बीच रहा, इसके बाद 2010 में दूसरी बार महिला महापौर समीक्षा गुप्ता चुनकर आई, जिनका कार्यकाल 2010 से 2015 तक रहा।

1965-66 के बाद कांग्रेस का महापौर नहीं बन पाया
कांग्रेस पार्टी पांच दशकों से महापौर पद पर काबिज नहीं हो सकी है। कांग्रेस पार्टी से 1965-66 में विष्णु माधव भागवत आखिरी महापौर थे, इसके बाद से कांग्रेस पार्टी से एक भी महापौर पद नहीं पहुंच सका। 1969-70 से भारतीय जनता पार्टी की ओर से स्व. नारायण कृष्ण शेजवलकर महापौर चुने गए थे उसके बाद से विवके नारायण शेजवलकर तक महापौर की कुर्सी पर भाजपा का ही कब्जा रहा है।

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