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National Junk Food Day 2023: सालभर में 30 करोड़ का जंक फूड खा रहा है शहर, बढ़ा रहा है मोटापा !

National Junk Food Day: रोटी सब्जी को देखकर अक्सर मुंह बनाने वाले बच्चे जंक फूड देखकर खुश हो जाते हैं। जंक फूड खाने में भले ही टेस्टी लगता हो लेकिन लम्बे समय तक खाने से कई बीमारियां घर कर जाती हैं। जंक फूड का सेवन करने वाले बच्चे अधिकतर मोटापे का शिकार होते हैं। शहर के कैफे और रेस्टोरेंट के शेफ के बीच किए सर्वे के अनुसार हर साल शहर 30 करोड़ का जंक फूड खा जाता है। इसे बच्चों के साथ युवा भी पसंद कर रहे हैं।

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National Junk Food Day

आइसीएमआर के अनुसार सेहत को नुकसान पहुंचा रहा जंक फूड

शरीर को एक हेल्दी और पौष्टिक डाइट की जरूरत होती है, जो शरीर को एक्टिव रखने के साथ बीमारियों से भी बचाए। आजकल चलन में जंक फूड का सेवन अधिक हो गया है। नेशनल फूड एंड टेस्टिंग एजेंसी के अनुसार 2019 में जंक फूड का सेवन करने वालों का आकड़ा जहां 25 प्रतिशत था, वो 2022 में 40 प्रतिशत के पार पहुंच गया है। आइसीएमआर। (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) के अनुसार जंक फूड सेहत को नुकसान पहुंचान वाला खाद्य पदार्थ है।

जंक फूड में चीनी, नमक और फैट अधिक मात्रा में होता है। हाई कैलोरी वाले ये सभी फूड पोषण के स्तर पर शून्य हैं, जो दिखने में लुभावने लगते हैं। इन्हें देखते ही खाने का मन तो करता है, लेकिन ये पौष्टिक नहीं हैं। जंक फूड का सेवन हमारी लाइफ की गुणवत्ता बिगाड़ रहा है। जंक फूड खाने से मोटापे की समस्या बढ़ती है। आगे चलकर कॉर्डियक डिसीज, इम्युनिटी सिस्टम वीक होने सहित अन्य बीमारियां हो जाती हैं। बच्चों का जंक फूड की तरफ इंट्रेस्ट होने से वे रोटी, सब्जी, दाल को अवॉइड करते हैं, जिससे उन्हें न्यूट्रीशन नहीं मिल पाता। पोषक तत्व न मिलने से बच्चे कमजोर रह जाते हैं।

पैरेंट्स अपने बच्चों को मार्केट में जंक फूड खिलाने के बजाए घर पर ही डिशेज तैयार कर सकते हैं। मिलेट्स से तैयार नए आयटम उन्हें टेस्ट कराएं। कभी-कभी जंक फूड भी खिला सकते हैं। जो बच्चे व युवा ज्यादा जंक फूड खाते हैं, वे आउटडोर एक्टिविटी, एक्सरसाइज जारी रखें।

जंक फूड के भरोसे चल रहा शहर, 25 परसेंट पॉपुलेशन की पसंद

ग्वालियर जंक फूड के भरोसे ही चल रहा है। आज स्ट्रीट फूड में जंक फूड ही मिल रहा है, जिसे छोटे और बड़े सभी चाव से खाते हैं। शहर की 25% पॉपुलेशन जंक फूड ज्यादा पसंद करती है। हालांकि अब जंक फूड में भी इनोवेशन हुए हैं। ब्रेड अब मैदे के बजाए आटे की यूज हो रही है। उस पर वेजिटेबल्स का ज्यादा यूज हो रहा है। कस्टमर को लाइव किचन के माध्यम से जंक फूड में फिलिंग के ऑप्शन भी मिल रहे हैं। वे अपने हिसाब से वेजिटेबल्स एड करा सकते हैं। जंक फूड परोसने वाली बड़ी कम्पनियों ने मैदे के उपयोग को कम किया है। साथ ही वेजिटेबल्स को बढ़ाया है।

जंक फूड खाने से प्रतिवर्ष बढ़ रही 8% लोगों में बीमारी

सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वॉयर्नमेंट की टेस्टिंग लैब में किए गए रिसर्च में पाया गया है कि भारत में एफएसएसएआई के मानकों की तुलना में पैकेज्ड फूड आइटम में फैट, तेल और नमक की मात्रा अधिक है। रिसर्च में चिप्स, नमकीन, बर्गर, स्प्रिंग रोल, पिज्जा सहित कुल 33 जंक फूड को शामिल किया गया, जिसे लोग अधिक पसंद करते हैं। जंक फूड के सेवन से प्रतिवर्ष 8 प्रतिशत लोगों में बीमारी बढ़ रही है।