10 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

माता की पूजा से मिलता है आत्म बल,ऐसी है मां की महिमा

माता की पूजा से मिलता है आत्म बल,ऐसी है मां की महिमा
2 min read
Google source verification
mata

माता की पूजा से मिलता है आत्म बल,ऐसी है मां की महिमा

ग्वालियर। शारदीय नवरात्र आज से प्रारंभ हो रही हैं। इस दिन घट स्थापना से उपासना शुरू हो जाएगी। पहले दिन माता के दो स्वरूपों का पूजन किया जाएगा। प्रतिपदा और द्वितीय तिथि एक साथ होने से पहले दिन माता दुर्गा के दो स्वरूप शैलपुत्री और ब्रह्मचारिणी की पूजा होगी। शारदीय नवरात्र को लेकर लोगों में उत्साह बना हुआ है। पंडित राधेश्याम शर्मा ने बताया कि देवी पुराण के मुताबिक मां शैलपुत्री की पूजा करने वाले के मन से भय कम होता है, शक्ति बढ़ती है और मन में आत्म विश्वास जागता है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से व्यक्ति का चरित्र प्रबल होता है। शारीरिक बल में वृद्धि होती है।

मां चंद्रघंटा की पूजा से मनुष्य के स्वरूप में निखार आता है और उसका वैचारिक स्तर बढ़ता है। बुरी संगत से व्यक्ति पर पडऩे वाला प्रभाव कम होता है। मां कुष्मांडा की पूजा करने से पृथ्वी माता प्रसन्न होती हैं। व्यक्ति को धनधान्य की कमी नहीं रहती है। स्कंदमाता की पूजा से साधक को मनोवांछित संतान की प्राप्ति होती है। माता देवी कात्यायनी कामना पूरी करती हैं। जिनके शादी-विवाह को लेकर दोष कुंडली में होते हैं, पूजा अर्चना से शादी में आने वाली अड़चने दूर हो जाती हैं।

माता कालरात्रि की पूजा से शत्रु का भय मन से खत्म होता है। माता की पूजा करने से शत्रु जातक से भयभीत होने लगता है। माता देवी महागौरी गृहस्थ व्यक्ति के लिए सबसे उत्तम बताई गई है। माता सिद्धिदात्री की पूजा मंत्र साधना और तंत्र साधना के लिए प्रमुख तौर पर बताई गई है। कुंडली जाग्रत करना आदि के लिए की जाती है।

मेले लगाए जाने की तैयारी शुरू
नवरात्र को लेकर घरों,मंदिरों में नवदुर्गा उत्सव मनाए जाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। शहर में कई जगह माता के पंडाल सजाए जाएंगे। नौ दिन तक भजन-कीर्तन, हवन पूजन होंगे। माता के अलग-अलग स्वरूपों को विराजमान कराया जाएगा। बुधवार को प्रतिपदा पर घट स्थापना होगी, जबारे बोए जाएंगे। अखंड ज्योति जलाई जाएगी। कन्या पूजन किया जाएगा। माता के नौ स्वरूपों का पूजन १८ अक्टूबर तक चलेगा। इस दिन माता की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। माता के पूजन को लेकर मंदिरों में मेले लगाए जाने की तैयारी शुरू हो गई है।

रतनगढ़ और पीताम्बरा माता जाएंगे हजारों श्रद्धालु
माता की नौ दिन तक उपासना किए जाने को लेकर हर रोज शहर के मंदिरों के अलावा अंचल के रतनगढ़ और पीताम्बरा पीठ पर सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं की भीड़ जाएगी। इन दोनों मंदिरों पर हर रोज हजारों की तादाद में श्रद्धालु आएंगे। इसके अलावा शीतला माता मंदिर पर जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी हजारों में रहेगी। पहले ही दिन से पैदल पद यात्रा कर शहर व आस-पास के लोग शीतला माता के दर्शनों के लिए पहुंचेंगे।

घट स्थापना का समय
पं. शास्त्री के मुताबिक घट स्थापना का शुभ मुहूर्त बुधवार को सुबह 7.30 बजे से 9 बजे तक, अभिजीत काल 11.30 से 12.40 तक रहेगा। दोपहरमें 2.30 से 4.10 बजे तक रहेगा। शाम के समय 5.55 से 7.20 बजे तक का समय उत्तम है।