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शहर के शैक्षणिक संस्थानों में स्टूडेंट्स कर रहे नए इनोवेशन

टेक्नोलॉजी में नित नए प्रयोग हो रहे हैं। इसमें हमारा ग्वालियर भी पीछे नहीं है। शहर के शैक्षणिक संस्थानों में स्टूडेंट्स नए इनोवेशन कर रहे हैं। शहर में कई ऐसे स्टूडेंट्स हैं, जिन्होंने कई नए आइडियाज पर टेक्नोलॉजी का यूज कर शहर को नई सौगातें दी हैं।

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National Technology Day

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ग्वालियर. टेक्नोलॉजी में नित नए प्रयोग हो रहे हैं। इसमें हमारा ग्वालियर भी पीछे नहीं है। शहर के शैक्षणिक संस्थानों में स्टूडेंट्स नए इनोवेशन कर रहे हैं। शहर में कई ऐसे स्टूडेंट्स हैं, जिन्होंने कई नए आइडियाज पर टेक्नोलॉजी का यूज कर शहर को नई सौगातें दी हैं। आज नेशनल टेक्नोलॉजी डे है। हम आपको कुछ ऐसे ही टेक्नोलॉजी से परिचित करा रहे हैं, जिनका यूज कर उन्होंने कई नई चीजें तैयार कीं।

पाल्यूशन कंट्रोल करने के लिए लिया इनिशिएटिव

टीम लीडर फलित गोयल ने बताया कि शहर में पॉल्यूशन बहुत अधिक है। हेल्दी एन्वॉयर्नमेंट को ध्यान में रखते हुए यह स्कूटर इजाद किया है। उन्होंने बताया कि आरटीओ के नार्म्स के अनुसार यदि मोटर 250 वॉट से कम और स्पीड 25 किमी/ घंटे तक है, तो रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है। फलित ने यह स्कूटर कबाड़ से खरीदा था, जिसे छह माह की मेहनत के बाद तैयार किया गया।

0 पॉल्यूशन पर तैयार किया स्कूटर

आरजेआईटी में इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन स्टूडेंट्स ने 0 पाल्यूशन पर एक स्कूटर तैयार किया है, जिसे बनाने में छह माह का समय लगा। टीम लीडर फलित गोयल ने अपने साथी हितेश कुशवाह, हिमांशी बाथम, पंकज यादव के साथ मिलकर यह स्कूटर तैयार किया है। स्कूटर में टू स्ट्रोक 150 सीसी का इंजन लगा था, जिसे हटाकर हमने 250 वॉट की बीएलडीसी मोटर लगाई है, जिसकी टॉप स्पीड 25 किलोमीटर/घंटा है। इसे चार्ज करने में 1 यूनिट बिजली खर्च होती है। यह 25 किमी/घंटे की स्पीड से 70 किमी. की दूरी तय कर सकता है। इसकी बैटरी चार्ज करने में 4 से 6 घंटे का समय लगता है। यह स्कूटर फैकल्टी एडवाइजर संदीप अग्रवाल के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है।

मोबाइल से कंट्रोल होंगे होम एप्लायंसेज

बीआइटीएस कॉलेज के स्टूडेंट्स ने होम ऑटोमेशन अप्लीकेशन तैयार की है, जिसे फोन पर डाउनलोड कर देश-दुनिया में कहीं पर भी रहकर होम एप्लायंसेज को कंट्रोल किया जा सकता है। इसके लिए अपने मोबाइल पर स्टूडेंट्स द्वारा बनाई गई अप्लीकेशन डाउनलोड करनी होगी। इसे राहुल कुमार, चन्द्रमा विश्वास, आदिल हुसैन ने मिलकर तैयार किया है। इसमें स्टूडेंट्स को लगभग ढाई महीने का समय लगा। इसमें 3000 रुपए खर्च आया है।