
तपोवन की जमीन पर कब्जा, बनाया जा रहा भवन
ग्वालियर. भू-माफिया ने झांसी रोड स्थित तपोवन की लगभग 4 हजार वर्गफीट जमीन पर भवन निर्माण शुरू कर दिया है। लगभग 5 करोड़ रुपए की इस जमीन को हथियाने माफिया ने नहर की पुलिया को भी खत्म कर दिया है, इससे बारिश होने पर देवनगर और नाका चंद्रबदनी क्षेत्र से होने वाली जल निकासी अवरुद्ध होने पर हालात बिगड़ सकते हैं। पुलिया के पास 20 मीटर रिटेनिंग वॉल पर भी कब्जा कर लिया है और ग्रीन बेल्ट के पेड़ काट दिए हैं। इसकी शिकायत पहले वन विभाग में की गई थी, लेकिन जब विभागीय अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया तो तपोवन से सेवानिवृत सहायक वन संरक्षक अजय तिवारी ने वन मंत्री और कलक्टर से शिकायत कर वन भूमि को बचाने की गुहार लगाई है। शिकायत में सीसीएफ और अन्य वन अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप लगाए गए हैं।
इन अधिकारियों की हुई शिकायत
शिकायतकर्ता ने वन मंत्री उमंग सिंघार और कलक्टर भरत यादव को शिकायत की है कि हार्वेस्टिंग पाउंड पर भू माफिया द्वारा अवैध रूप से बनाए जा रहे भवन का निर्माण सीसीएफ हरिशंकर मोहंता की जानकारी में चल रहा है, जबकि अतिक्रमण करवाने में वनपाल मकरंद सिंह नरवरिया और रेंजर यशोवर्धन टेलर की भूमिका है।
गायब हो गई पुलिया
रियासतकाल में केदारपुर से नाका चंद्रबदनी, जयविलास पैलेस परिसर से होकर बैजाताल तक नहर थी। जलापूर्ति के लिए बनाई नहर की पुलिया तपोवन के गेट के पास थी। माफिया ने पुलिया को खत्म कर दिया है।
यहां है अतिक्रमण
वर्ष 2003 में जमीन को बचाने के लिए तत्कालीन वन मंडलाधिकारी ने पत्र के जरिए जिला प्रशासन का ध्यानाकर्षण कराया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
23 जुलाई 2002 में तत्कालीन वन अधिकारी भागवत सिंह ने जिला प्रशासन को जानकारी दी थी कि मिसिल बंदोबस्त संवत 1997 (सन 1940) सरकारी रेकॉर्ड में सर्वे नंबर 1434 और 1453 शासकीय नजूल के रूप में दर्ज रही है, इस जमीन को खुर्दबुर्द करने के लिए दस्तावेजों में छेड़छाड़ की गई है। इसके बाद न्यू पारस विहार कॉलोनी के नाम से प्लॉट बेच दिए गए।
14 जनवरी 2005 को दो रजिस्ट्रियों का पंजीयन कराया गया था, रजिस्ट्री में जगह मुख्य रोड से बहुत अंदर बताई गई है।
2005 के बाद 2016 तक इस वन भूमि पर किसी का कब्जा नहीं रहा।
30 अगस्त 2016 को लेखापाल रोशनलाल, सुरक्षाकर्मी नरेश, तत्कालीन सीसीएफ की जानकारी में वन भूमि की फोटोग्राफी कराई गई थी, उस समय तक तपोवन के गेट से सटी इस बेशकीमती भूमि पर कब्जा नहीं था।
अजयपुर बीट में है जमीन
कुछ समय पहले अजयपुर बीट के कक्ष 34-35 का संयुक्त सीमांकन कराने से हकीकत सामने आ सकती है। तपोवन की नजूल और वन विभाग की इस जमीन का प्रबंधन और संरक्षण वन विस्तार अधिकारी द्वारा होता है। नजूल भूमि को सुरक्षित रखा जाता तो यहां खेल मैदान या शासकीय भवन बनाए जा सकते थे।
Published on:
16 Feb 2019 06:28 pm
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