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मंगल छत्र एवं सिद्धि योग में श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया बुढ़वा मंगल

- हनुमान मंदिरों पर श्रद्धालुओं ने किए सुंदरकांड पाठ  

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मंगल छत्र एवं सिद्धि योग में श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया बुढ़वा मंगल

मंगल छत्र एवं सिद्धि योग में श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया बुढ़वा मंगल

ग्वालियर. ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष एवं शुक्ल पक्ष में पडऩे वाले सभी मंगलवारों को बुढ़वा या बड़ा मंगल के नाम से जाना जाता है। पहला बुढ़वा मंगल मंगलवार को श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया। प्रथम बुढ़वा मंगल छत्र एवं सिद्धि योग में मनाया गया। दूसरा बुढ़वा मंगल 16 मई, तीसरा 23 मई और चौथा 30 मई को पड़ेगा। बुढ़वा मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने का खास महत्व माना जाता है। इसी के चलते मंगलवार को हनुमान मंदिरों रोकडिय़ा सरकार, गरगज हनुमान, संकट मोचन हनुमान, मंशापूर्ण हनुमान, बालाजी सरकार सहित अंचल के दंदरौआ धाम वाले डॉक्टर हनुमान पर श्रद्धालुओं की खासी भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने मंगलवार को हनुमानजी को चोला अर्पित करने के साथ साथ मोतीचूर के लड्डुओं का भोग भी लगाया।

इसलिए मनता है बुढ़वा मंगल
काल गणना में चंद्रमास के अनुसार ज्येष्ठ माह को श्रेष्ठ अथवा बड़े माह की मान्यता प्रदान की गई है। ऐसी मान्यता है कि महाभारत काल में भीम को अपनी शक्तियों पर भारी घमंड हो गया था, उसी समय हनुमान जी बूढे वानर का रूप धारण कर वहां पहुंचे और भीम के घमंड को तोड़ दिया। इस कथा का वर्णन महाभारत में विस्तार से मिलता है। तभी से बुढ़वा मंगल की परंपरा प्रारंभ हो गई। ज्येष्ठ माह के सभी मंगलवार को हनुमान के वृद्ध स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है।

खेड़ापति को लगे छप्पन भोग
शहर के खेड़ापति मंदिर पर बुढ़वा मंगल पर विशेष तैयारियां की गई थीं। खेड़ापति मंदिर पर छप्पन भोग, सुंदरकांड का पाठ और भंडारा प्रसादी का वितरण किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।