
मध्यप्रदेश की वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट परियोजना पूरे देश के लिए ही अनमोल
आदिवासी अंचल की वनोपज को उत्पाद में बदलने का काम बहनें कर रही हैं, 500 करोड़ के उत्पाद बहनों ने विक्रय किए हैं। कौशल विकास योजना के अंतर्गत इन्हें और बल मिलेगा। उन्होंने कहा, आजकल ऑनलाइन खरीदारी का प्रचलन है इसलिए सरकारी प्लेटफॉर्म जेम पर सरस नाम से विशेष स्थान रखा गया है। इसके जरिये सीधे समूह अपने उत्पाद सरकार और सरकारी विभागों को बेच सकते हैं। पीएम ने समूहों की महिलाओं से कहा कि श्योपुर में लकड़ी के नक्काशी के उत्पाद बनते हैं। इसको जेम में पंजीकृत कराइए। इससे पहले उन्होंने कहा कि अब खेती, पशुपालन, शिक्षा, बैंकिंग, बीमा, मार्केटिंग, पोषण, भंडारण में प्रबंधन से महिलाओं को जोड़ा जा रहा है। दीनदयाल अंत्योदय योजना इस काम मेंंं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। महिलाएं पशु सखी, कृषि सखी, बैंक सखी जैसे काम सफलता से कर रही हैं। जल जीवन मिशन में हर घर पाइप से जल पहुंचाने के लिए देश में 7 करोड़ और प्रदेश में 40 लाख परिवारों को नल से जल पहुंच रहा है। पानी मिलने के बाद डबल इंजन की सरकार को माताएं दुआएं देती हैं। 3 हजार नल जल योजनाएं समूह की महिलाओंं के पास हैं, इनका संधारण और संचालन महिलाएं ही कर रही हैं। आजीविका मिशन से 8 करोड़ से अधिक बहनें जुड़ी हैं। इसका मतलब 8 करोड़ परिवार जुड़े हैं। मध्यप्रदेश की 40 लाख से अधिक बहनें समूहों से जुड़ी हैं। आजीविका मिशन के अंतर्गत जितनी मदद दी गयी, उससे बीते साल में तेरह गुना बढ़ोतरी हुई है। हर समूह को जहां पहले 10 लाख तक का बिना गारंटी ऋण मिलता था, अब इसे दोगुना कर दिया है और 10 लाख से लेकर 3 करोड़ तक की मदद दी जा रही है। महिलाओं की ईमानदारी, प्रयास और क्षमता पर भरोसा है, इसलिए सरकार और बेंक लोन दे रही हैं।
विदेशी मेहमान की थाली में
भी परोसा जाए मोटा अनाज
प्रधानमंत्री ने कहा कि सितंबर पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है, अंतर राष्ट्रीय स्तर पर यह महीना इस बार मोटे अनाज को प्रोत्साहित करने के रूप में मनाया जा रहा है। हमारी सरकार द्वारा कोदों, कुटकी, बाजरा, ज्वार, रावी आदि अनाज को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। आप भी ध्यान रखें जब भी विदेशी मेहमान आए तो उसकी थाली में मोटा अनाज परोसा जाना चाहिए।
महिलाओं की समस्याओं को किया गया कम
स्वयं समूह की महिलाओंं की महिलाओं का आव्हान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले घर परिवार में माताओं को अनेक समस्या थीं, घर के काम मेंं भागीदारी नहीं थी, पारिवारिक निर्णयोंं में उनकी भूमिका नहीं होती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं है, आत्म निर्भरता बढऩे से परिवार मेंं महिलाओं का महत्व बढ़ा है। देश मेंं पहले सोचे समझे प्रयास नहीं होते थे, लेकिन बीते वर्षों से देश चुनौतियों के समाधान में जुटा है।
योजनाओं को किया याद
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित की जा रही योजनाओं की भी सभी को याद दिलाई। उन्होंने कहा कि देश मेंं पहले पेयजल, चूल्हा जैसी अनेक समस्याएं थीं। लेकिन अब 7 करोड उज्जवला कनैक्शन महिलाओं को मिले हैं, इससे चूल्हे से निजात मिली है। 11 करोड़ शौचालय बनने से खुले मेंं शौच की समस्या का समाधान हुआ है। इसी तरह गर्भावस्था में भी महिलाओं को तमााम समस्याएं आती थीं, लेकिन अब प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से 11 हजार करोड़ रुपए से अधिक महिलाओंं के खाते में पहुंचे हैं। इसमें से मध्यप्रदेश की महिलाओं के खाते में 1300 करोड़ रुपए पहुंंचे हैं। इससे गरीब परिवारोंं को लाभ मिला है। योजनाओं के माध्यम से यह तय किया गया है कि बेटियां पढ़ाई कर सकें, शौचालय बेहतर हों और सेनेटरी पैड की भी सुविधा दिलाई गई है। ढाई करोड़ जन धन खाते खोले गए हैं, इसका फायदा यह है कि ये खाते पैसा ट्रांसफर करते समय काम आए।
बढ़ी है महिलाओं की भागीदारी
प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले खेत, दुकान, गाड़ी सब पुरुष के नाम पर रहता था और पति के न रहने पर बेटे के नाम पर हो जाता था। सरकार ने इस परिपाटी को खत्म किया गया है, पीएम आवास सीधे महिलाओं के नाम पर करके ताकत दी है और 2 करोड़ महिलाएं अपने घर की मालिक हैं। रोजगार के लिए दिया गया 70 प्रतिशत पैसा उद्यम करने वाली महिलाओं को मिला है। इससे महिलाएं समाज में सशक्त हुई हैं। आठ वर्ष पहले तक महिलाओं के लिए जो दरवाजे बंद थे, वे हमारी सरकार ने खोल दिए। अब हमारे देश की बेटियां पुलिस कमांडो हैं, सीमा पर भारत की बेटियां भारत मां की रक्षा कर रहीं हैं
Published on:
18 Sept 2022 12:16 am
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