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खतरे में मुसाफिरों की जान: ट्रेन में जा रहे हैं तो रहें अलर्ट, इंडियन रेलवे हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करते रहे पैसेंजर्स, डॉक्टर तो आए नहीं आ गई मौत

वाइस चांसलर की जान बचाने के लिए फोन लगाते रहे मुसाफिर, नहीं मिला इलाज...उनके साथ सफर करने वाले युवकों की टीम लगातार रेल अधिकारियों और हेल्पलाइन को फोन कर मदद मांगती रही, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी...

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रेल में सफर के दौरान तबियत बिगड़ने पर डाॅक्टर और दवा मिलने के दावे खोखले हैं। रविवार, सोमवार रात झांसी के निजी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर को अगर सफर के दौरान इलाज मिलता तो उनकी जान बच सकती थी। उनके साथ सफर करने वाले युवकों की टीम लगातार रेल अधिकारियों और हेल्पलाइन को फोन कर मदद मांगती रही, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी।

निजी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर रणजीत सिंह यादव 68 की तबियत दिल्ली से झांसी का सफर करते वक्त आगरा पहुंचने पर बिगड़ी थी। आशंका है उन्हें हार्ट अटैक आया था। उनके साथी मुसाफिरों ने रणजीत की हालत देखकर आगरा से ही रेल अधिकारियों और हेल्पलाइन को डाॅक्टर और दवा के लिए फोन लगाए थे। उम्मीद थी कि मुरैना पर एंबुलेंस तो मिल जाएगी, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। मुरैना से ग्वालियर तक रणजीत सिंह तड़पते रहे। ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर भी उनके इलाज का इंतजाम नहीं मिला।

रेलवे के यह दावे खोखले
- सफर में तबियत खराब होने पर टिकट संग्राहक को जानकारी देने पर मदद मिलेगी।
- टिवटर पर आइआरसीटीसी को टैग कर मुसाफिर अपना पीएनआर नंबर के साथ परेशानी का विवरण देने पर मदद मिलेगी।
- 138 पर कॉल पर मुसाफिर समस्या बता सकते हैं।
- आधुनिक व्यवस्था के तहत ट्रेनों में एक अलग डिब्बे में डॉक्टर की व्यवस्था होगी, जिससे मरीज को आपात स्थिति में तुरंत मदद मिलेगी।
- 162 ट्रेन में मेडिकल बाक्स रहेंगे। इनमें जीवन रक्षक सहित 58 तरह की दवाएं होंगी।
- रेलवे स्टेशन पर मरीज को उतारने चढ़ाने के लिए स्ट्रेचर का इंतजाम रहेगा।

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रणजीत सिंह की हालत बिगडऩे पर मुसाफिरों की मदद के दावे खोखले साबित हुए। इसके अलावा उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए हो हल्ला मचा तब मामला जीआरपी और आरपीएफ की नजर में आया होगा। लेकिन रेलवे और मुसाफिरों की सुरक्षा करने वाले पुलिसकर्मी भी तमाशबीन ही रहे। रणजीत सिंह को अस्पताल पहुंचाने के लिए वाहन का इंतजाम तक नहीं कराया।

तबियत खराब होने की सूचना नहीं
दक्षिण एक्सप्रेस में यात्री की तबियत खराब होने की सूचना रेलवे को नहीं मिली थी। ट्रेन में जब चेन पुलिंग हुई तो डिप्टी एसएस और आरपीएफ ने देखा तो एक यात्री को कुछ लोग ट्रेन से उतार रहे थे। इसके बाद डिप्टी एसएस ने 108 एंबुलेंस को फोन करके बुलाया। जब तक 108एंबुलेंस आती तब तक कुछ लोग उस यात्री को लेकर जाने लगे। इस पर आरपीएफ का एक जवान उस गाड़ी के पीछे गया। यात्री को जेएएच लेकर कुछ लोग पहुंचे।
- लालाराम सोलंकी, स्टेशन डायरेक्टर

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