
gwalior high court
हाईकोर्ट की युगल पीठ ने सरकारी जमीनों को खुर्दबुर्द करने के मामले में चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने प्रमुख सचिव को अवगत कराते हुए कहा कि हमारे संज्ञान में ऐसे मामले आए हैं, जिसमें सरकारी जमीन के खसरे में गलत इंट्री कर जमीन अपने नाम कर रहे हैं। दूसरा जिला न्यायालय में जमीन का दावा आता है। शासकीय अधिवक्ता व राजस्व अधिकारी जवाब के लिए उपस्थित नहीं होते हैं। आदेश एक पक्षीय हो जाता है। इस गड़बड़ी को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं। प्रमुख सचिव विवेक कुमार ने कहा कि रिकॉर्ड को डिजिटल कर रहे हैं। डिजिटल होने पर मूल रिकॉर्ड देखने को नहीं मिलेगा। कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों को सकारात्मक बताते हुए कहा कि पहले ‘समाधान आपके द्वार’ योजना के तहत कई छोटे-मोटे विवादों का निपटारा हुआ था। इस योजना को संस्थागत रूप से लागू किया जाए ताकि समाज में ‘लिटिगेशन फ्री’ वातावरण बन सके। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि 25 अगस्त तक हलफनामा दाखिल करें, जिसमें इन सभी कदमों की विस्तृत जानकारी हो, ताकि इस पहल को आगे बढ़ाया जा सके।
राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ने अदालत को बताया कि जमीन के सटीक स्थान और सीमाओं की पहचान के लिए ड्रोन मैपिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यह तकनीक सुनिश्चित करेगी कि जमीन की लोकेशन और आकार का सही रिकॉर्ड बने, जिससे अतिक्रमण या फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जे की कोशिशों पर रोक लगाई जा सके।
-अब तहसीलदार और एसडीओ को ‘डेडिकेटेड रेवेन्यू ऑफिसर्स’ के रूप में तैनात किया जा रहा है, जो नियमित रूप से राजस्व संबंधी मामलों का निपटारा करेंगे। इससे पहले जहां ऐसे मामलों में सुनवाई में देरी होती थी, अब नियमित और तेज समाधान संभव होगा। राज्य प्रकरण लंबित नहीं रहेंगे।
-ऑटोमैटिक म्यूटेशन प्रणाली लागू की जा रही है। इसके तहत जैसे ही जमीन की बिक्री रजिस्टर्ड डीड के माध्यम से होती है, जानकारी राजस्व अधिकारियों तक पहुंच जाएगी। यदि सात दिनों के भीतर कोई आपत्ति नहीं आती, तो म्यूटेशन अपने-आप पूरा हो जाएगा। यह व्यवस्था फर्जी दावों और देरी से होने वाले विवादों पर रोक लगाएगी। प्रदेश में 80 लाख नामांतरण कर चुके हैं।
विधि विभाग के प्रमुख सचिव एनपी सिंह ने अदालत को बताया कि जिला अदालतों और हाईकोर्ट में सरकारी वकीलों की अनुपस्थिति रोकने के लिए जिलों में मॉनिटरिंग सेल बनाए जाएंगे। यह सेल प्रत्येक माह जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता में बैठक करेगा, जिसमें लंबित मामलों की समीक्षा होगी। साथ ही, अपील दाखिल करने में होने वाली देरी को रोकने के लिए 2018 की लिटिगेशन पॉलिसी में संशोधन की योजना भी तैयार की जा रही है।
Updated on:
14 Aug 2025 11:13 am
Published on:
14 Aug 2025 11:12 am
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