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काहे की नो एंट्री: अफसर कहते हैं हैवी टै्रफिक पर हमारा फुल कंट्रोल, इधर पुलिस फोर्स कर रहा एंट्री सिस्टम फेल

रात के वक्त शहर में हैवी ट्रैफिक नो एंट्री फेल हो गई है। इसे फेल करने में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी अहम भूमिका निभा रहे हैं

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no entry in city of heavy vehicle

पुनीत श्रीवास्तव @ ग्वालियर

रात के वक्त शहर में हैवी ट्रैफिक नो एंट्री फेल हो गई है। इसे फेल करने में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी अहम भूमिका निभा रहे हैं, जबकि अफसर ताल ठोककर कहते हैं कि शहर की सड़कें सीसीटीवी की निगरानी में हैं। कोई भारी वाहन नजर बचाकर शहर में नहीं घुस सकता। पत्रिका ने तीन दिन तक नो एंट्री का जायजा लिया तो नो एंट्री जोन में पुलिस की साठगांठ से हैवी व्हीकल को एंट्री करते हुए मिले।

झांसी रोड पर मिले हालात: विक्की फैक्ट्री से दिन और रात के वक्त कोई भी हैवी व्हीकल शहर में दाखिल नहीं होगा। पुलिस अफसरों और चेंबर पदाधिकारियों ने तय किया है,लेकिन फरमान को पुख्ता लागू करने के लिए नाके पर ट्रैफिक पुलिस की डयूटी है। आधी रात के वक्त यह पुलिसकर्मी नो एंट्री के फरमान को तव्वजो नहीं देते। रात एक बजे के बाद भारी वाहनों को मौका देखकर नो एंट्री में दाखिल कराया जाता है। यह गोरखधंधा कुछ घंटे चलता है।

23 अक्टूबर रात 1.45 बजे
विक्की फैक्ट्री पर हैवी ट्रैफिक को रोकने के लिए ट्रैफिक पुलिस की डयूटी थी। इस प्वाइंट से कुछ भारी वाहन शहर में दाखिल होने की फिराक में थे। पुलिसकर्मियों ने बेरीकेड्स लगा रखे थे। कुछ वाहन इस प्वाइंट से नो एंट्री में जाना चाहते तो स्टॉपर तक आ गए। डयूटी कर रहे पुलिसकर्मियों ने उन्हें वापस जाने के लिए डंडे घुमाकर फटकारा, लेकिन वाहन चालक नहीं हटे बल्कि सीधे लेनदेन आ गए। प्वाइंट पर खड़े एक पुलिसकर्मी ने ट्रक की क्लीनर साइड की खिड़की में हाथ डाला। उसके बाद बेरीकेड्स सरकाकर उसे अंदर आने की इजाजत दी।

२4 अक्टूबर रात 2 बजे
सिटी सेंटर से कोई भारी वाहन एजी आफिस पुल पर नहीं जाएगा। रोकने के लिए एजी आफिस एसबीआई एटीएम के सामने ट्रैफिक का प्वाइंट डयूटी पर था। ट्रैफिक एएसआई पुल के पास बाइक पर बैठे थे, तीन सिपाही भी वहीं खड़े होकर बातें कर रहे थे। पुल से ट्रक आता दिखा सिपाहियों ने लपक कर बेरीकेड्स खींचकर ट्रक को रोक लिया। करीब २ मिनट तक ट्रक चालक और पुलिसकर्मियों के बीच बातचीत हुई और उसे बसंत विहार रुट से जाने के लिए कहा गया।

25 अक्टूबर रात 1.30 बजे
शिवाजी उद्यान सिटी सेंटर के सामने ट्रैफिक प्वाइंट पर एक कंटेनर खड़ा था। क्योंकि उसके प्वाइंट पर पहुंचने से कुछ सेकेंड पहले पुलिसकर्मियों की रजामंदी से डंपर एजी ऑफिस पुल क्रॉस कर रहा था। कंटेनर चालक जाने देने की जिद पर अड़ा था। पांच मिनट तक उसे रोकने के बाद सिपाहियों ने बेरीकेड्स हटा दिया।


रात २ बजे: एजी आफिस पुल से विक्की फैक्ट्री रुट पर ट्रक, डंपर आदि की आवाजाही थी।


रात २:३० बजे: शहर के अंदर से आकर सिथौली की तरफ जाने वाले ट्रकों की कतार थी। यहां पुलिसकर्मियों ने बेरीकेड्स हटाकर एक ट्रक को रवाना कर दिया।

टीम को देख बोले- कैसे आ गए वाहन
रोक के बाद करीब 15 वाहन विक्की फैक्ट्री तिराहे पर कैसे आ गए। पत्रिका टीम ने यहां डयूटी पर मौजूद शिवपाल और आरक्षक रिकं से पूछा तो पुलिसकर्मी सकपका गए। पुलिसकर्मी ट्रक चालकों से पूछने लगे कि तुम लोग यहां तक कैसे आ गए। किसी ने रोका क्यों नहीं। क्या तुम्हें पुलिस नहीं मिली।

परमिशन है मेरे पास
नो एंट्री में दाखिल होने वाले ट्रक चालकों को पत्रिका टीम ने रोककर पूछा कि पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद वह अंदर कैसे आ गए तो वाहन चालकों के कई बहाने बताए। एजी आफिस पुल उतर कर बंसत विहार जा रहे ट्रक चालक का कहना था उसके पास परमीशन है,इसलिए पुलिसकर्मियों ने नहीं रोका।

शिवाजी उद्यान के सामने चेकिंग प्वाइंट पर रुककर कंटेनर एजी आफिस पुल पर कैसे चढ़ा। जब प्वाइंट पर तैनात पुलिसकर्मियों से पूछा तो वह उनका कहना था वाहन चालक कह रहा था वह सेना का सामान लेकर जा रहा है इसलिए जाने दिया।

ऐसी व्यवस्था किस काम की
नियम बनाने के बाद उन्हें चौथ वसूली कर तोड़ा जा रहा है तो इससे अच्छा उसे बंद कर दिया जाए। इस मामले में पुलिस अफसरों से चर्चा कर नियम तोडऩे वालों पर कार्रवाई और सख्ती से नो एंट्री का पालन किया जाए।
प्रवीण अग्रवाल, मानसेवी सचिव चेंबर ऑफ कामर्स

ये हैं नियम
शहर में लोडिंग अनलोडिंग के लिए आने वाले भारी वाहन रात 1 1 से 5 बजे आ सकेंगे।
मुरैना से आने वाले भारी वाहन पुरानी छावनी, यातायात नगर से शहर में आएंगे।
भिण्ड से आने वाले वाहन सात नंबर चौराहे मुरार, हजीरा होकर पड़ाव फूलबाग जाएंगे।
झांसी की तरफ से आने वाले वाहन हुरावली चौराहे, सिटी सेंटर, हजीरा, पड़ाव होकर लश्कर आएंगे।
शिवपुरी से आने वाले वाहन गोल पहाडिय़ा से शहर में आएंगे।
सिटी सेंटर व पड़ाव पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही नहीं होगी।

मुफ्त में नौकरी खतरे में क्यों डालेंगे
नो एंट्री में बेधड़क वाहन कैसे निकाले जा रहे हैं। पुलिस से साठगांठ कर निकलने वाले वाहन चालक खुलकर बताने से डरते हैं। वे इतना जरूर बोलते हैं कि मुफ्त में तो कोई नौकरी खतरे में नहीं डालता। शहर के अंदर से निकलने 100 से 500 रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं।


सिस्टम बिगाडऩे वालों पर होगी कार्रवाई
रात के समय भारी वाहनों की एंट्री के लिए रुट और समय तय है। विक्की फैक्ट्री से कुछ अत्यावश्यक सेवाओं के वाहनों को छोड़कर सभी वाहनों की एंट्री प्रतिबंधित है। नो एंट्री में भारी वाहनों को आने-जाने दिया जा रहा है तो जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होगी।
डॉ. आशीष, एसपी, ग्वालियर