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सड़कों पर बने अमानक स्पीड ब्रेकर से पीठ पर पड़ रहा दबाव, बढ़ रहे सर्वाइकल के मरीज

शहर की सड़कों पर बिना मानक के बने गति अवरोधक (स्पीड ब्रेकर) हादसे का कारण बन रहे हैं। स्पीड ब्रेकर की ऊंचाई तय मानक से अधिक होने व ढलान नहीं होने से ब्रेक लगते...

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सड़कों पर बने अमानक स्पीड ब्रेकर से पीठ पर पड़ रहा दबाव, बढ़ रहे सर्वाइकल के मरीज

ग्वालियर. शहर की सड़कों पर बिना मानक के बने गति अवरोधक (स्पीड ब्रेकर) हादसे का कारण बन रहे हैं। स्पीड ब्रेकर की ऊंचाई तय मानक से अधिक होने व ढलान नहीं होने से ब्रेक लगते ही वाहन असंतुलित हो जाते हैं, जिससे कई लोग गिरकर घायल हो गए हैं।
इन स्पीड ब्रेकर से वाहन चालकों की रीढ़ की हड्डी पर भी दबाव पडऩे से पीठ दर्द की समस्या बढ़ रही है। साथ ही स्पाइनल इंज्युरी के मरीज भी बढ़ रहे हैं। ऐसे मरीजों की संख्या में लगातार 20 प्रतिशत तक बढोत्तरी देखी जा रही है। शहर की कई कॉलोनियों और गलियों में निगम के अलावा स्थानीय लोगों ने भी स्पीड ब्रेकर बना रखे हैं।
लोगों का कहना है कि वाहन चालक तेज रफ्तार से वाहन निकालते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका रहती है। शहर की काला सैयद वाली गली, समाधिया कॉलोनी, सिटी सेंटर क्षेत्र की कॉलोनी, नवगृह कॉलोनी सहित कई गलियों में मानक को दरकिनार कर गति अवरोधक बनाए गए हैं। इनसे वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक कम और कमर को झटका अधिक लग रहा है। साथ ही वाहनों में टूट फूट भी अधिक बढ़ रही हैं।


ये है नियम
रोड सेफ्टी के तहत स्पीड ब्रेकर बनाने के लिए नियम और मानक तय किए गए हैं। इसके अनुसार स्पीड ब्रेकर की चौड़ाई 12 इंच और ऊंचाई अधिकतम 6 इंच होनी चाहिए। स्पीड ब्रेकर के दोनों किनारे शून्य डिग्री पर होने चाहिए। स्पीड ब्रेकर काले-पीले रंग से पुते हों और 20 फीट पहले ही उसका संकेतक होना चाहिए। गली-मोहल्लों में स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए जा सकते हैं।


सर्वाइकल, स्पाइनल इंज्युरी के बढ़ रहे मरीज
शहर की सड़कों व गली-मोहल्लों में ऊंचे स्पीड ब्रेकर वाहनों को झटका देकर उछाल देते हैं, इससे चालक की कमर पर जोर पड़ता है। झटकों से स्लिपडिस्क, गर्दन में ङ्क्षखचाव स्पाइनल इंज्युरी, सर्वाइकल स्पॉंडिलाइटिस के मरीजों की करीब 20 प्रतिशत वृद्धि हो रही है।


वाहनों में बढ़ रही टूट-फूट
ङ्क्षशदे की छावनी व सेवानगर क्षेत्र में दो पहिया वाहन मैकेनिक राजेंद्र कुशवाह, गगन अरोरा, याकूब खान व इस्लाम ने बताया कि बारिश के बाद से शहर की सड़के बदहाल हैं, जो वाहनों को क्षति पहुंचा रही हैं, वहीं बेमानक बने गति अवरोधक वाहनों को समय से पहले खराब कर रहे हैं। गली-मोहल्लों में ऊंचे ब्रेकर से वाहनों के शॉकअप, किलच प्लेट और बॉडी सहित अन्य सामान में खराबी आ रही है। वहीं बार-बार ब्रेक लगाने व गियर बदलने से पेट्रोल की खपत भी अधिक होती है।


जंप अधिक न लगे, ऐसे हों ब्रेकर
शहर की सड़कों पर स्पीड ब्रेकर ऐसे होना चाहिए कि वाहन चालक को जंप अधिक नहीं लगे और वह आसानी से वाहन चला सके। रोड सेफ्टी के हिसाब से ही स्पीड ब्रेकर लगाए जाने चाहिए। गली-मोहल्ले में स्पीड ब्रेकर नहीं लगाए जा सकते हैं।
प्रो.अंजली पाटिल, सिविल इंजीनियर, एमआइटीएस


गली- मोहल्ले में स्पीड ब्रेकर गलत
रोड सेफ्टी एक्ट के हिसाब से ही निगम व पीडब्ल्यूडी को स्पीड ब्रेकर बनाना चाहिए। यदि गली-मोहल्ले में जगह-जगह स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं तो यह गलत है। शहर में आधा मीटर पर एक स्पीड ब्रेकर होना चाहिए। यदि स्पीड ब्रेकर से कोई घायल, स्पाइनल इंज्युरी, सर्वाइकल व स्पांडिलाइटिस का शिकार होता है तो वह अवकृत विधि में मामला दर्ज करा सकता है।
अवधेश ङ्क्षसह तोमर, एडवोकेट हाईकोर्ट

20 प्रतिशत मरीज बढ़े
शहर की जर्जर सड़कें व बिना मानक के स्पीड ब्रेकर बनाए जाने से स्पाइनल इंज्युरी, सर्वाइकल व स्पांडिलाइटिस के मरीज बढ़ रहे हैं। जेएएच में भी करीब 20 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है। स्पीड ब्रेकर बनाते समय नियमों का ध्यान रखाना चाहिए।
डॉ. आदित्य श्रीवास्तव, एसोसिएट प्रोफेसर, जेएएच


शिकायत आने पर हटाते हैं स्पीड ब्रेकर
अधिकतर लोग खुद ही मनमाने ढंग से गति अवरोधक बना रहे हैं। ऐसे लोगों की शिकायत आते ही टीम को भेजकर वहां से स्पीड ब्रेकर को हटा दिया जाता है। टीम को भेजकर जहां भी स्पीड ब्रेकर सही नहीं बने हैं उन्हें सही बनवाया जाएगा।
किशोर कान्याल, आयुक्त नगर निगम