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लखनऊ व सीधी की ठगी का ग्वालियर कनेक्शन, QATM सर्वर से खुली पोल, 2 एजेंट दबोचे

तानसेन की नगरी अब अंतरराज्यीय साइबर अपराधियों का नया ठिकाना बनता जा रहा है। दूसरे राज्यों और मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में आम लोगों से होने वाली लाखों रुपये की ऑनलाइन ठगी का कनेक्शन लगातार ग्वालियर से जुड़ रहा है। ताजा मामले में लखनऊ और सीधी जिले में हुई लाखों रुपये की साइबर फ्रॉड की वारदातों की जांच करते हुए पुलिस की टीमों ने दबिश देकर दो एजेंटों को दबोच लिया है।
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ग्वालियर

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Punit Shrivastava

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Updated: 13 Aug 2026, 3:07 PM IST

क्यूएटीएम सर्वर से खुली पोल

लखनऊ व सीधी की ठगी का ग्वालियर कनेक्शन

तानसेन की नगरी अब अंतरराज्यीय साइबर अपराधियों का नया ठिकाना बनता जा रहा है। दूसरे राज्यों और मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में आम लोगों से होने वाली लाखों रुपये की ऑनलाइन ठगी का कनेक्शन लगातार ग्वालियर से जुड़ रहा है। ताजा मामले में लखनऊ और सीधी जिले में हुई लाखों रुपये की साइबर फ्रॉड की वारदातों की जांच करते हुए पुलिस की टीमों ने दबिश देकर दो एजेंटों को दबोच लिया है। पकड़े गए आरोपी साइबर ठगों के लिए म्यूल खाते मुहैया कराने और ठगी का पैसा एटीएम से विड्रॉ कर सरगना तक पहुंचाने का काम कर रहे थे।
जानकारी के अनुसार, लखनऊ और सीधी में साइबर ठगों ने कई लोगों के खाते साफ कर दिए थे। संबंधित जिलों की साइबर पुलिस ने पैसों के डिजिटल रास्ते (मनी-ट्रेल) का पीछा किया, तो पता चला कि ऑनलाइन ठगी गई रकम का एक बड़ा हिस्सा ग्वालियर शहर के अलग-अलग एटीएम से नकद निकाला गया है। इसके बाद पुलिस के कान खड़े हो गए। स्थानीय साइबर सेल की मदद से जब संबंधित एटीएम बूथों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, तो दो युवकों द्वारा बार-बार अलग-अलग कार्ड्स से भारी रकम निकालने की पुष्टि हुई।

क्यूएटीएम सर्वर तकनीक से बेनकाब हुए चेहरे

संदिग्ध फुटेज सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपियों की पहचान के लिए अत्याधुनिक क्यूएटीएम सर्वर तकनीक की मदद ली। चेहरों के फोटो को जब इस सर्वर पर अपलोड किया गया, तो सॉफ्टवेयर ने सोशल मीडिया और डिजिटल फुटप्रिंट्स को स्कैन करते हुए कुछ ही समय में आरोपियों की पूरी कुंडली सामने रख दी। पुलिस ने घेराबंदी कर रमन शर्मा और शिवांक श्रीवास्तव को दबोच लिया।

ऐसे काम करता है क्यूएटीएम सर्वर?

  • साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ठगी का पैसा अलग-अलग राज्यों में म्यूल खातों में भेजा जाता है। इसके बाद लोकल एजेंट एटीएम से जाकर कैश निकाल लेते हैं।
  • जब एटीएम बूथ के सीसीटीवी से किसी संदिग्ध व्यक्ति की फोटो मिलती है, तो उसे क्यूएटीएम सर्वर पर अपलोड किया जाता है।
  • यह सर्वर एआइ और फेशियल रिकॉग्निशन के जरिए सोशल मीडिया (फेसबुक, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन आदि) और पब्लिक डेटाबेस से चेहरा मैच कर व्यक्ति का नाम, पता और पूरी प्रोफाइल सामने ला देता है

ठगों की बी-टीम है ये लोकल एजेंट

पकड़े गए रमन शर्मा और शिवांक श्रीवास्तव साइबर गिरोह की बी-टीम के सदस्य हैं। ये स्थानीय बेरोजगार युवाओं और सीधे-साधे लोगों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। जैसे ही राजस्थान, झारखंड (जामताड़ा) या मेवात में बैठे मास्टरमाइंड किसी पीड़ित से ठगी करते थे, पैसा तुरंत इन खातों में आता था और ग्वालियर में बैठे ये एजेंट एटीएम से कैश निकालकर आगे अपना कमीशन काटकर सरगना को पहुंचा देते थे।

दोनों आरोपियों पर एफआइआर
देर रात गोला का मंदिर थाना पुलिस ने रमन शर्मा और शिवांग श्रीवास्तव को अरेस्ट कर लिया है। दोनों से साइबर ठगी में उनके साथ शामिल और आरोपियों के बारे में पूछताछ की जा रही है। पुलिस का मानना है आरोपियों के साथ रैकेट में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। उनके सामने आने पर ग्वालियर अंचल में साइबर ठगों के नेटवर्क का खुलासा होगा।

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