
भारत छोड़ो आंदोलन: गांधी जी के आव्हान पर सड़कों पर उतरे तीन हजार युवा
ग्वालियर। महात्मा गांधी द्वारा भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा करने के बाद पूरा देश अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उठ खड़ा हुआ। इसका असर ग्वालियर में भी हुआ और 10 अगस्त 1942 को सार्वजनिक सभा और विद्यार्थी संघ ने हड़ताल की घोषणा कर दी। प्रभात फेरियां निकालीं। स्कूल कॉलेज बंद कर सरकार के साथ असहयोग करने का आव्हान किया गया। मिल और स्कूल कॉलेज पर धरना शुरू हो गया। इसका असर यह हुआ कि हर तरफ अंग्रेजो के खिलाफ आग दहकने लगी। 4 दिन बाद यह आंदोलन और उग्र हो गया। विक्टोरिया कॉलेज (वर्तमान में एमएलबी कॉलेज) आंदोलनकारियों की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन गया। यहां हजारों छात्र इक_े हो गए और जुलूस निकालते हुए अंग्रेजों के खिलाफ नारे लगाते हुए महाराज बाड़ा पर पहुंचे। इस जुलूस में 3000 से अधिक विद्यार्थी थे, जिनमें अली अहमद, रामरूप तिवारी एवं धुले साहब आगे चल रहे थे। छात्रों के सड़कों पर उतरने से आजादी के आंदोलन की ज्वाला भड़क गई थी।
बस में आग लगाई, सिपाहियों की पगड़ी उतारी
देशभक्त छात्र उग्र हो गए और उन्होंने एक बस को आग के हवाले कर दिया और सिपाहियों की पगड़ी उतार ली। छात्रों से घबराई हुकुमत ने लाठीचार्ज करवा दिया जिसमें कई लोग घायल हुए। इसके बाद हुकूमत में घटना की जांच करवाई और 17 नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। इनमें दत्ता जी राव, एस सीथोले, माता प्रसाद, उदय किशोर, सुरेंद्र नाथ गुप्ता, बैकुंठ नाथ गुप्ता, राजेंद्र सिंह, कृष्ण गोपाल अग्निहोत्री, कृष्ण बिहारी, पीके जुत्सी, उद्धव कुमार, चेतराम चौबे, कन्हैयालाल, टीपू टम्बाली, हीरा सिंह एवं नाथू प्रसाद गिरफ्तार किए गए।
गिरफ्तारी से गुस्सा भड़का
हुकूमत चाहती थी कि आंदोलन थम जाए और स्कूल कॉलेज फिर से खुल जाएं, लेकिन 17 नेताओं की गिरफ्तारी ने लोगों का गुस्सा और भड़का दिया, जिस पर 55 नेताओं की गिरफ्तारी के आदेश दिए गए। हुकूमत जितना दमन कर रही थी उसका उल्टा असर हो रहा था, आंदोलन थमने के बजाय और उग्र हो गया।
गिरफ्तार कर शिवपुरी जेल भेजा
गिरफ्तार यों के बाद 22 -23 अगस्त को भेलसा सार्वजनिक सभा की बैठक हुई, जिसमें आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया गया। इसका पता सरकार को चल गया तो आंदोलन को दबाने के लिए सभी नेताओं की गिरफ्तारी के आदेश जारी कर दिए गए। श्याम लाल पाण्डवीय, जगन्नाथ प्रसाद मिलिंद, करकर बमोल, डॉ सदानंद भजन लाल शर्मा देवलाल रूद्र प्रभु दयाल एवं गजाधर प्रसाद सहित सैकड़ों नेताओं को पकड़कर शिवपुरी जेल भेज दिया गया।
महिलाएं भी थीं सड़कों पर
नेताओं की लगातार गिरफ्तारी के बाद थी ग्वालियर में आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा था। छात्रों मिलो के कर्मचारियों के साथ महिलाएं भी सड़कों पर उतर कर आजादी की लड़ाई में अपनी सक्रिय भागीदारी निभा रही थीं। महाराज बाड़े से उनके भी जुलूस निकाले जा रहे थे। सरकार ने मदन देवी, जमुना बाई और लक्ष्मीबाई वैश्य को गिरफ्तार कर लिया।
अंचल में भी भड़क रही थी आजादी की ज्वाला
ग्वालियर में छात्र, मिलों के कर्मचारी और महिलाएं सड़कों पर थे और लगातार गिरफ्तार किए जा रहे थे, वहीं ग्वालियर के आसपास भी आजादी की ज्वाला भड़क रही थी। मुरैना मैं छीतर मल जैन की अध्यक्षता में बैठक कर आंदोलन को तेज करने का फैसला लिया गया। इसके बाद आंदोलन भड़का तो राम गोपाल बंसल विधि चंद्र, अंबिका प्रसाद, विभा मास्टर हरी चंदर चौधरी, प्रभु दयाल है वैश्य, हीरालाल बंसल, मोतीलाल, मुन्ना लाल पंचोली, हरगोविंद, बालमुकुंद शर्मा, हरिदास राठी, हरिदास माहेश्वरी, गुलाब चंद्र वर्मा सहित सैकड़ों लोग गिरफ्तार कर लिए गए। उधर भिंड में भूता और यशवंत सिंह कुशवाहा ने जिले भर मैं घूम कर आंदोलन को तेज कर दिया इस पर उन्हें जेल भेज दिया गया। इससे आंदोलन और भड़क गया और लोगों ने रेल की पटरी उखाड़ दी, टेलीफोन के तार काट दिए, भिंड और एंतहार स्टेशन के बीच सवारी गाड़ी को उलट दिया, कई लोग गिरफ्तार किए गए। श्योपुर और सुपर मैं भी आंदोलनकारी सड़क पर थे जिस पर सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।
Published on:
09 Aug 2022 06:47 pm
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