ग्वालियर। बेटे को मां की बीमारी का पता चला, तो आनन-फानन में राजधानी का ई-टिकट निकाला। जल्दबाजी में टिकट पर नाम गलत हो गया। स्टेशन पर गलती सुधरवाना चाही, लेकिन अफसरों ने टाल दिया। बोला, कोई दिक्कत नहीं आएगी।
टीटीई को बताया तो उसने भी देखते हैं कहकर बैठने को बोल दिया। ट्रेन चल दी, उसके बाद टीटीई आकर जुर्माना करने लगा। रुपए देने से मना किया तो ग्वालियर पर उतारने लगा। तब उसने प्रभु याद किया। प्रभु ने भी निराश नहीं किया। बेटे की बात सुनी, उसके बाद राजधानी में सफर करने देने के लिए टीटीई को निर्देश दिए।
नागपुर के अस्पताल में भर्ती है कैंसर मरीज
शनिवार को सतनजीब बराल को पता चला मां संजीता बराल (70) को कैंसर है। वो नागपुर के अस्पताल में भर्ती हैं।
राहुल ने दिल्ली से नागपुर जाने के लिए पत्नी शोनाली को तत्काल ई-टिकट निकालने को बोला। पत्नी ने नई दिल्ली-बिलासपुर राजधानी एक्सप्रेस का मोबाइल से टिकट बनाया, लेकिन गलती से यात्री के नाम की जगह अपना नाम लिख दिया। पर उम्र पति की और जेंडर में पुरुष लिखा।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचने पर जब राहुल ने टिकट देखा तो उसे गलती का पता चला। अपना व पत्नी का आईडी प्रूफ लेकर गलती सुधरवाने डिप्टी एसएस कॉमर्शियल कार्यालय पहुंचा, लेकिन वहां गलती सुधारने के बजाय उसे गुमराह कर ट्रेन पर जाने को बोल दिया। ट्रेन पर खड़े टीटीई को बताया, तो उसने भी आप बैठो देखेंगे बोल दिया।
4000 रुपए जुर्माना दो या फिर ग्वालियर उतरो
सतनजीब बी-1 की 1 नंबर सीट पर आकर बैठ गया, जब ट्रेन चलने लगी, तो टीटीई आया। उसने सतनजीब से 4000 रुपए जुर्माना देने को कहा। सतनजीब ने पत्नी का आईडी और अपना आईडी भी दिखाया। अपनी परेशानी बताई। पर टीटीई नहीं माना।
अन्य यात्रियों ने भी टीटीई का विरोध किया। पर उसने एक न सुनी। जुर्माना न देने पर ग्वालियर स्टेशन पर उतरने को बोल दिया। ग्वालियर आने वाला था उससे पहले सतनजीब ने रेलमंत्री से ट्वीट कर मदद मांगी। रेलवे बोर्ड से फोन आया। सतनजीब ने अपनी समस्या बताई। वहीं कंट्रोल रूम से ट्रेन अटेंड करने का ग्वालियर मैसेज आया। रेलवे बोर्ड के अधिकारियों ने सतनजीब से नाम गलत होने का आवेदन टीटीई को देने को कहा।