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विलुप्त होती इंडियन स्कीमर को चंबल का सहारा, 80 फीसदी BIRDS चंबल अभयारण्य में

विलुप्त प्रजातियों में शुमार पक्षी इंडियन स्कीमर, जिसकी देश भर की संख्या का लगभग 80 फीसदी संख्या चंबल में मिलती है।

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Shyamendra Parihar

Jan 17, 2017

indian skimmer

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जयसिंह गुर्जर @ श्योपुर

कहने को भले ही चंबल अभयारण्य घडिय़ाल प्रजाति के लिए ही संरक्षित है, लेकिन यहां अन्य जीव और पक्षी भी अपना घरौंदा बना रहा हैं। उनमें से एक है विलुप्त प्रजातियों में शुमार पक्षी इंडियन स्कीमर, जिसकी देश भर की संख्या का लगभग 80 फीसदी संख्या चंबल में मिलती है। हालांकि यहां अन्य प्रजातियों के पक्षी भी बहुतायत में पाए जाते हैं, लेकिन इंडियन स्कीमर एक्पर्ट और अभयारण्य के पूर्व रिसर्चर डॉ.ऋषिकेश शर्मा ने इस पक्षी के संरक्षण के लिए विशेष उपाय करने का सुझाव अभयारण्य प्रबंधन को दिया है।

श्योपुर जिले के पाली घाट से लेकर उत्तरप्रदेश के चकरनगर तक 435 किलोमीटर की चंबल नदी को राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभयारण्य घोषित किया हुआ है। यूं तो यहां घडिय़ाल,मगरमच्छ और डॉल्फिन जैसे जलीय जीव खास हैं, लेकिन इस क्षेत्र में पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां भी कलरव करती नजर आती हैं और अभी तक 198 प्रजातियां की पहचान हो चुकी हैं। इन 198 पक्षियों की प्रजातियों में खास है इंडियर स्कीमर जो अब देश में धीरे-धीरे विलुप्त हो रहा है, लेकिन चंबल नदी इसे नया जीवन दे रही है।
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अभयारण्य में पूर्व फॉरेस्ट ऑफिसर और रिसर्चर डॉ. ऋषिकेश शर्मा ने अपने 30 साल तक के सर्वे पर किए विश्लेषण में पाया कि चंबल में लगभग आधा दर्जन स्थान ऐसे हैं, जहां इंडियन स्कीमर बहुतायत में पाए जाते हैं और इनके समूह आसानी से देखे जा सकते हैं। हालांकि मौसमी प्रभाव के चलते इनकी संख्या में हर साल उतार-चढ़ाव आता रहा है, लेकिन देश के 8 0 फीसदी इंडियर स्कीमर चंबल में मिलते हैं, ऐसे में यहां इन्हें संरक्षण की आवश्यकता है।

इन स्थानों पर इंडियन स्कीमर का ठिकाना
चंबल नदी के शुद्ध जल के साथ ही उथले हुए टापू और नेस्टिंग ग्राउंड की उपलब्धता के कारण चंबल नदी पक्षियों को रास आती है, यही वजह है कि हर साल यहां बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। लेकिन देश में विलुप्त होती इंडियन स्कीमर की प्रजाति ने यहां स्थाई ठिकाना सा बना लिया है, जो अक्टूबर से जून तक के बीच के लगभग 9 महीनों में आसानी से देखे जा सकते हैं। चंबल के रामेश्वर त्रिवेणी संगम, नदी गांव, डांग बसई, टिंगरी रिठौरा आदि सहित आधा दर्जन ऐसे स्थान हैं, जहां इंडीयन स्कीमरों के झुंड के झुंड मिलते हैं।

वर्ष 2016 में पाए सबसे ज्यादा स्कीमर
चंबल अभयारण्य में चंबल पिछले 13 सालों के वार्षिक सर्वे के मुताबिक इंडियन स्कीमर की संख्या में उतार-चढ़ाव आता रहा है, लेकिन बीते चार सालों में तो इंडियन स्कीमर की संख्या में अच्छा खास इजाफा हुआ है। अभयारण्य के पूर्व रिसर्चर डॉ.शर्मा के मुताबिक चंबल अभयारण्य में वर्ष 2003 में 242, 2004 में 306 , 2005 में 270, 2006 में 28 2, 2007 में 339, 2008 में 354, 2009 में 295, 2010 में 230, 2011 में 224, 2012 में 301, 2013 में 258 , 2014 में 302, 2015 में 325 और वर्ष 2016 में 439 इंडियन स्कीमरों की मौजूदगी मिली है।

यह बात सही है कि इंडियन स्कीमर देश का विलुप्त प्रजाति का पक्षी है, ऐसे में 80 फीसदी संख्या चंबल में मिलना बहुत बड़ी बात है। मैंने 30 साल तक अभयारण्य में सर्वे किया है और उस पर विश्लेषण कर रहा हूं, लेकिन यहां इंडियन स्कीमर के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास होने चाहिए।
डॉ.ऋषिकेश शर्मा, इंडियर स्कीमर एक्सपर्ट और पूर्व रिसर्चर चंबल अभयारण्य

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