चंबल नदी के शुद्ध जल के साथ ही उथले हुए टापू और नेस्टिंग ग्राउंड की उपलब्धता के कारण चंबल नदी पक्षियों को रास आती है, यही वजह है कि हर साल यहां बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। लेकिन देश में विलुप्त होती इंडियन स्कीमर की प्रजाति ने यहां स्थाई ठिकाना सा बना लिया है, जो अक्टूबर से जून तक के बीच के लगभग 9 महीनों में आसानी से देखे जा सकते हैं। चंबल के रामेश्वर त्रिवेणी संगम, नदी गांव, डांग बसई, टिंगरी रिठौरा आदि सहित आधा दर्जन ऐसे स्थान हैं, जहां इंडीयन स्कीमरों के झुंड के झुंड मिलते हैं।
वर्ष 2016 में पाए सबसे ज्यादा स्कीमर
चंबल अभयारण्य में चंबल पिछले 13 सालों के वार्षिक सर्वे के मुताबिक इंडियन स्कीमर की संख्या में उतार-चढ़ाव आता रहा है, लेकिन बीते चार सालों में तो इंडियन स्कीमर की संख्या में अच्छा खास इजाफा हुआ है। अभयारण्य के पूर्व रिसर्चर डॉ.शर्मा के मुताबिक चंबल अभयारण्य में वर्ष 2003 में 242, 2004 में 306 , 2005 में 270, 2006 में 28 2, 2007 में 339, 2008 में 354, 2009 में 295, 2010 में 230, 2011 में 224, 2012 में 301, 2013 में 258 , 2014 में 302, 2015 में 325 और वर्ष 2016 में 439 इंडियन स्कीमरों की मौजूदगी मिली है।