
एजी ऑफिस पुल के मुआवजे के दावे में शासन का जवाब अस्वीकार, 500 रुपए का हर्जाना भी लगाया
ग्वालियर. अतरिक्त सत्र न्यायालय ने गुरुवार को शासन के उस जबाव को अस्वीकार कर दिया, जिसमें एजी आफिस पुल की जमीन को शासकीय बताते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कमलाराजे चैरिटेबल ट्रस्ट के दावे को खारिज करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि मामला 2018 का है। शासन को जवाब पेश करने के लिए कई मौके दिए गए, लेकिन गंभीरता नहीं बरती गई। अंतिम मौके पर भी बहाना बनाते हुए जवाब नहीं दिया। शासन अपना हक खो चुका था। इसलिए जवाब को अस्वीकार किया जात है। साथ में 500 रुपए का हर्जाना भी लगाया जाता है।
शासन ने दावे के जवाब में कहा था कि राजस्व रिकॉर्ड में चारों सर्वे नंबर शासकीय दर्ज हैं। महलगांव के सर्वे क्रमांक 1071, 1072, 1073/1, 1073/2 की रकवा 0.450 हेक्टेयर भूमि पर जमीन पर पुल बना हुआ है। पुल एजी ऑफिस के नाम से जाना जाता है। इसलिए मुआवजा नहीं बनता है। दावे को खारिज किया जाए। न मुआवजा निर्धारित करने की जरूरत है। ट्रस्ट की ओर से जवाब का विरोध किया गया। बहस के बाद गुरुवार को फैसले की तारीख निर्धारित की थी। कोर्ट ने जवाब अस्वीकार कर दिया। वहीं दूसरी ओर अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने भी अंतरिम आवेदन पेश किया। इस आवेदन को भी खारिज कर दिया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि अंतरिम आवेदन में जो दस्तावेज पेश किए गए हैं, उन्हें शासन को पेश करना चाहिए था। तोमर का तर्क है कि हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट को अतिक्रमणकारी माना है। उनकी जमीन नहीं है। इस आवेदन पर ट्रस्ट व शासन जवाब नहीं दे सका। कोर्ट ने इस आवेदन पर भी जवाब मांगा है।
क्या है मामला
दरअसल केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कमलाराजे चैरिटेबल ट्रस्ट ने एजी आफिस पुल की जमीन का 7.55 करोड़ मुआवजा 12 फीसद ब्याज के साथ मांगा है। महलगांव के सर्वे क्रमांक 1071, 1072, 1073/1, 1073/2 की रकवा 0.450 हेक्टेयर भूमि पर शासन अतिक्रमणकारी मानते हुए मुआवजा मांगा है।
Published on:
18 Aug 2023 11:13 am

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