8 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

बिना ठोस साक्ष्य के स्वास्थ्य बीमा क्लेम खारिज करना सेवा में कमी

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने बिना ठोस साक्ष्य के उपभोक्ता के स्वास्थ्य बीमा दावे को खारिज करने को सेवा में कमी माना है...

2 min read
Google source verification
बिना ठोस साक्ष्य के स्वास्थ्य बीमा क्लेम खारिज करना सेवा में कमी,

बिना ठोस साक्ष्य के स्वास्थ्य बीमा क्लेम खारिज करना सेवा में कमी,

ग्वालियर. जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने बिना ठोस साक्ष्य के उपभोक्ता के स्वास्थ्य बीमा दावे को खारिज करने को सेवा में कमी माना है। आयोग ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिए कि वह उपभोक्ता को स्वीकृत बीमा राशि, ब्याज और मानसिक क्षतिपूर्ति का भुगतान करे। बीमा कंपनी ने डायबिटीज, हाइपरटेंशन व मोटापे की जानकारी छिपाने का आरोप लगाकर क्लेम खारिज किया था।
ग्वालियर निवासी पूजा शर्मा ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी से हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। पॉलिसी अवधि के दौरान सितंबर- 2024 में उनकी तबीयत बिगडऩे पर उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ा। इलाज के दौरान कैशलेस सुविधा के लिए बीमा कंपनी से अनुरोध किया गया, लेकिन अतिरिक्त दस्तावेज मांगने के बाद भी कंपनी ने कैशलेस क्लेम स्वीकृत नहीं किया।
इलाज के बाद पूजा शर्मा ने 1 लाख 98 हजार 809 रुपए का दावा प्रस्तुत किया, जिसे बीमा कंपनी ने यह कहकर खारिज कर दिया कि पॉलिसी लेते समय उन्होंने डायबिटीज, हाइपरटेंशन और ओबेसिटी जैसी पूर्व बीमारियों की जानकारी छुपाई थी।

बीमा कंपनी साबित नहीं कर सकी, पॉलिसी लेने से पहले पीडि़त थीं
आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया कि बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि पॉलिसी लेने से पहले उपभोक्ता इन बीमारियों से पीडि़त थीं और उन्हें इसकी जानकारी थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल अनुमान या सामान्य आरोपों के आधार पर दावा निरस्त करना उचित नहीं है। आदेश में कहा गया कि बीमा कंपनी ने बिना पर्याप्त प्रमाण के उपभोक्ता का वैध दावा खारिज कर सेवा में कमी की है। आयोग ने शिकायत स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को निर्देश दिए कि वह 1 लाख 86 हजार 548 रुपए की बीमा राशि 45 दिनों के भीतर अदा करे। साथ ही निर्धारित अवधि में भुगतान न होने की स्थिति में राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। इसके अलावा मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 1500 रुपए और वाद व्यय के रूप में 1000 रुपए अलग से देने का आदेश भी पारित किया गया।