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VIDEO : MP के इस शहर में भेष बदलकर रहे थे नेताजी सुभाष बोस, लोग पुकारते थे इस नाम से, वीडियों में देखे सच्चाई

नागदा में नागेश्वर मंदिर में 24 साल तक रहे एक साधु को स्थानीय लोग मानते थे सुभाष बोस,मुखर्जी आयोग ने भी खंगाले थे रिकार्ड

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subhash chandra

subhash chandra bose

ग्वालियर/श्योपुर। आजादी के सात दशक में भी नेता जी की मौत का रहस्य अब तक नहीं सुलझ सका है। आज भी 18 अगस्त 1945 को हुए विमान हादसे की सच्चाई को लेकर ढेरों सवाल हैं। लेकिन श्योपुर के लोग मानते हैं कि नेताजी विमान हादसे में नहीं मरे,बल्कि वह बच निकले थे और उन्होंने 1953 से 1977 तक का समय श्योपुर के नागदा गांव में सी ज्योतिर्देव नाम से साधु का भेष धरकर गुजारा। साधु वेश में श्योपुर के नागदा में रहे बाबा सी ज्योतिर्देव के नजदीकी रहे लोग भले ही आज जीवित नहीं है। लेकिन बताया जाता है कि उन्होंने बाबा के ही बोस होने को लेकर गठित खोसला आयोग और फिर बने मुखर्जी आयोग के समक्ष दावे किए।

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मुखर्जी आयोग ने सुभाष चन्द्र बोस को लेकर श्योपुर वासियों द्वारा किए गए दावे को आधारपरक माना और जांच के लिए दल श्योपुर में इसकी सच्चाई परखने के लिए 5 जुलाई 2001 को कमिश्नर एनके पंाजा के नेतृत्व में श्योपुर आया और सिंचाई विभाग रेस्ट हाउस पर बाबा के नजदीकी रामभरोसे शर्मा नागदा,दावा करने वाले लहचौड़ा के चिरोंजी लाल शर्मा आदि के कथन किए,जबकि इस संबंध में बताने के लिए वहां पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

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बताया गया है कि मुखर्जी आयोग नागदा में रहे बाबा ज्योतिर्देव के सुभाष चन्द्र बोस होने की जांच बाद जब वापस लौटा, तब श्योपुर के लोगों का कोई दावा खारिज नहीं किया। बल्कि इसके बाद आयोग ने श्योपुर वासियों को 2005 तक कलकत्ता में एनेक्सि भवन महाजति सदन 166 में सुनवाई के लिए बुलवाया। मुखर्जी आयोग के स्पेशल ड्यूटी ऑफिसर एम रॉय लगातार पत्र लिखकर श्योपुर के इन गवाहों को बाबा के समर्थन में पक्ष रखने के लिए कलकत्ता बुलाते रहे, लेकिन 2001 में मुखर्जी आयोग के श्योपुर से जांच करके वापस जाने के बाद इस संबंध में कलकत्ता जाकर सी ज्योतिर्देव बाबा के सुभाष चन्द्र बोस होने को लेकर किसी ने भी अपना पक्ष नहीं रखा।

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बताया जाता है कि इस दौरान बोस के परिजनों सहित अन्य कई लोगों के साथ इनके कथन होना थे,जिसके लिए रामभरोसे शर्मा को बुलवाया भी गया था,लेकिन किन्हीं कारण से वह 2001 के बाद की किसी भी सुनवाई पर नहीं पहुंच पाए थे।

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"बाबा ही नेताजी थे,इस बात के कई प्रमाण मौजूद हैं,जो मुखर्जी आयोग को भी मेरे साथियों द्वारा दिए गए थे। बाबा हमेंशा सतर्क रहकर गुप्त बने रहे,क्योंकि उन्हें अंतर्राष्ट्रीय मुजरिम करार देते हुए इंग्लेंड को सौंपने की संधि की हुई थी। जिसके कारण से उन्होंने कभी भी खुद को उजागर नहीं किया,यहां तक कि लोगों ने जब इसके लिए प्रयास किया तब भी उन्होंने संदेश देकर लोगों को शांत रहने के लिए कहा गया।"
विष्णु शंकर गौड़, पूर्व नपाध्यक्ष व बाबा को देखने वाले, श्योपुर