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राजस्व मंडल ने खारिज किया शासन का पुनर्विचार आवेदन, सिरोल की 80 करोड़ की जमीन निकल सकती है हाथ से

राजस्व मंडल ने शासन के उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें सिरोल की 16 बीघा जमीन को निजी माने जाने के फैसले में बदलाव की मांग की थी। मंडल ने कहा कि पुनर्विचार आवेदन की जगह शासन को हाईकोर्ट में याचिका दायर करनी थी।

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Board of Revenue

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राजस्व मंडल ने शासन के उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें सिरोल की 16 बीघा जमीन को निजी माने जाने के फैसले में बदलाव की मांग की थी। मंडल ने कहा कि पुनर्विचार आवेदन की जगह शासन को हाईकोर्ट में याचिका दायर करनी थी। एक बार आदेश का पुनर्विचार हो चुका है। दूसरा बार पुनर्विचार नहीं किया जाता है। इसलिए यह सुनवाई योग्य नहीं है। राजस्व मंडल ने 14 अगस्त 2025 को प्रकरण को समाप्त कर दिया। वहीं दूसरी ओर शासन हाईकोर्ट में राजस्व मंडल के आदेश को चुनौती देता है तो लिमिटेशन (समय सीमा) का संकट आएगा। डिले के आधार पर याचिका खारिज होती है तो शासन के हाथ से 80 करोड़ की जमीन निकल सकता है।

दरअसल 2004 में सिरोल के सर्वे क्रमांक 74, 75 शिकायत की। जसवंत सिंह अन्य ने आरोप लगाया कि सिरोल के सर्वे क्रमांक 74,75 भूमि चरनोई व बेहड़ की है। इस भूमि पर सरदार सिंह ने कब्जा कर लिया है। इस शिकायत पर जमीन को निगरानी में लिया गया। जब मामले की जांच की गई तो पांच सर्वे नंबर की जमीन को निजी किया गया। कलेक्टर ने प्रकरण को निगरानी में लेते हुए 2007 में रिकॉर्ड में सुधार का आदेश दिया। जिन राजस्व अधिकारियों ने गड़बड़ी की, उनके खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए। सिटी सेंटर तहसीलदार कुलदीपक दुबे का कहना है कि राजस्व मंडल के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रहे हैं।

फैसले को राजस्व मंडल में दी चुनौती

सरदार सिंह पुत्र बलवंत व बलवंत पुत्र जहार सिंह ने कलेक्टर के आदेश को राजस्व मंडल में चुनौती दी। राजस्व मंडल ने 2011 में फैसला सुनाया और कलेक्टर के फैसले को सही माना और जमीन शासकीय मानी गई। 8 साल बाद 2019 में बलवंत व सरदार सिंह ने राजस्व मंडल में फिर से पुनर्विचार आवेदन लगाया। राजस्व मंडल के अध्यक्ष ने कलेक्टर के फैसले को गलत माना और 22 जून 2007 के आदेश को निरस्त कर दिया। जमीन निजी मानी।

-शासन ने पुनर्विचार फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती नहीं दी। इसके बाद 2021 में फिर से राजस्व मंडल में पुनर्विचार आवेदन पेश कर दिया। इस आवेदन को भूल गए। चार बाद शासन के पुनर्विचार आवेदन पर सुनवाई हुई तो मंडल ने उसे खारिज कर दिया। तर्क दिया कि एक बार ही पुनर्विचार नहीं किया जा सकता है।

इन सर्वे नंबर की जमीन को किया था सरकारी

सर्वे रकबा हेक्टेयर में भूमि का प्रकार

35 0.031 शासकीय सेड़ा

74 1.902 चारागाह

75 0.512 चारागाह

117 0.658 शासकीय

118 0.230 शासकीय बेहड़

(पांच सर्वे नंबर 16 बीघा जमीन है।)